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    झोपडी में रहकर श्रवण सियाग ने किया संघर्ष : थार के रेगिस्तान से पहुंचा नीट की ऊंचाइयों तक

    ShagunBy ShagunJune 15, 2025 करियर No Comments4 Mins Read
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    Post Views: 3,863

    नीतू सिंह

    राजस्थान के बाड़मेर जिले के नरेवा (खट्टू) गांव की कच्ची झोपड़ियों में रहने वाले श्रवण कुमार सियाग की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। नीट यूजी 2025 में 556 अंकों के साथ AIR 9754 रैंक हासिल कर श्रवण ने साबित कर दिया कि अभाव और संघर्ष सपनों के आड़े नहीं आ सकते। उनकी यह प्रेरक यात्रा हर उस युवा के लिए मार्गदर्शक है जो कठिन परिस्थितियों में अपने करियर को आकार देना चाहता है।

    संघर्ष की कहानी

    सोचने वाली बात है झोपडी में रहकर कितना संघर्ष किया होगा बाड़मेर के श्रवण ने और किन हालातों में पढाई कर नीट में सफलता हासिल की होगी यह नए युवा छात्रों और छात्राओं के लिए प्रेरणदायक कदम है।

    श्रवण सियाग का वह घर जहाँ उसके टीच और माँ और दादी बहन और भाई साथ खड़े है -बताया जा रहा है अब उसके झोपड़े को तोड़कर नया मकान स्थानीय लोग बनाएंगे : फोटो वीडियो क्लिप से साभार

    बता दें कि श्रवण का परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा। उनके पिता रेखाराम सियाग वर्षा ऋतु में खेती करते और बाकी समय शादियों में जूठे बर्तन साफ करने जैसे कामों से परिवार का गुजारा चलाते। श्रवण भी कम उम्र में मजदूरी और मकान चुनाई जैसे कठिन कामों में हाथ बंटाते थे। कच्ची झोपड़ी और चिमनी की रोशनी में पढ़ाई करना उनके लिए रोजमर्रा का संघर्ष था। फिर भी, श्रवण ने हिम्मत नहीं हारी। दसवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की और बिना किसी कोचिंग के, केवल आत्म-अध्ययन और दृढ़ संकल्प के बल पर नीट की तैयारी की।

    फिफ्टी विलेजर्स संस्था की भूमिका

    श्रवण की प्रतिभा को निखारने में फिफ्टी विलेजर्स संस्था का अहम योगदान रहा। इस संस्था ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। मार्गदर्शन, संसाधन, और प्रेरणा प्रदान कर संस्था ने श्रवण को उनके सपने की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाया। यह दर्शाता है कि सामुदायिक समर्थन और सही दिशा कितने बड़े बदलाव ला सकते हैं।

    नीट की सफलता और प्रेरणा

    श्रवण की नीट में सफलता केवल एक परीक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, लगन, और आत्मविश्वास की जीत है। 556 अंकों के साथ उन्होंने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों, सही दिशा और मेहनत से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके पिता की भावुक प्रतिक्रिया, “अब झूठे बर्तन धोने से छूट जाऊंगा,” इस जीत की गहराई को दर्शाती है।

    युवाओं के लिए करियर मार्गदर्शन

    श्रवण की कहानी युवा छात्रों और छात्राओं के लिए कई सबक देती है:

    1. दृढ़ संकल्प रखें: श्रवण ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें और चुनौतियों को अवसर में बदलें।
    2. आत्म-अध्ययन की शक्ति: कोचिंग के बिना भी श्रवण ने नीट जैसी कठिन परीक्षा पास की। ऑनलाइन संसाधन, पुस्तकें, और नियमित अभ्यास से आप भी सफलता पा सकते हैं। NCERT की किताबें नीट की तैयारी के लिए आधार हैं। यूट्यूब और मुफ्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे ‘Unacademy’ या ‘Khan Academy’ मददगार हो सकते हैं।
    3. समय प्रबंधन: श्रवण ने मजदूरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाया। रोजाना 4-6 घंटे की केंद्रित पढ़ाई और समय-समय पर मॉक टेस्ट देना नीट की तैयारी के लिए जरूरी है।
    4. सामुदायिक समर्थन लें: फिफ्टी विलेजर्स जैसी संस्थाएं या स्थानीय शिक्षक आपके मार्गदर्शक बन सकते हैं। अपने आसपास के संसाधनों का उपयोग करें।
    5. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं: बड़े सपनों को छोटे-छोटे पड़ावों में बांटें। रोजाना एक टॉपिक पूरा करने या एक टेस्ट देने का लक्ष्य रखें।
    6. स्वास्थ्य का ध्यान रखें: लंबे समय तक मेहनत के लिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य जरूरी है। नियमित व्यायाम, ध्यान, और पर्याप्त नींद लें।

    नए युवाओं के लिए प्रेरणा

    श्रवण की कहानी हर उस युवा को प्रेरित करती है जो यह सोचता है कि संसाधनों की कमी उनकी राह में रुकावट है। चाहे मेडिकल, इंजीनियरिंग, यूपीएससी, या कोई अन्य क्षेत्र हो, मेहनत और विश्वास के साथ हर लक्ष्य संभव है। श्रवण जैसे युवा हमें सिखाते हैं कि सपने वही साकार होते हैं, जो हार नहीं मानते।

    अब आगे श्रवण अब डॉक्टर बनने की राह पर हैं। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और समाज को गर्व से भर दिया। फादर्स डे पर उनके पिता के लिए यह सबसे अनमोल तोहफा है। श्रवण की कहानी हमें याद दिलाती है कि “थार की रेत से भी इतिहास रचा जा सकता है, अगर हौसले बुलंद हों।”

    युवाओं, उठो, अपने सपनों को पंख दो, और श्रवण की तरह अभावों को अपनी ताकत बनाओ। बाड़मेर का यह गुदड़ी का लाल आज हर युवा के लिए एक मिसाल है।

    Shagun

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