एकजुटता दिखाने की जरुरत

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कोरोना से मुकाबले के लिए वैसे तो पूरा देश एकजुट है लेकिन कुछ लोग इस काम में सहयोग न देकर प्रकारांतर में अपना ही नुकसान कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों से देश भर में बंदी लागू की गई है। इसमें अधिकांश लोग सहयोग भी कर रहे हैं। हालांकि यह जरूरत अभी खत्म नहीं हुई है लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो इसमें सहयोग नहीं कर रहे हैं। जो बीमारी संक्रमण से ही बढ़ती हो और उसी संक्रमण से बचाव के लिये जब घरों में रहने के लिए अपील की जा रही है, तब यह समझ में नहीं आता कि इसे न मानकर ये लोग क्या दिखाना चाहते हैं। पिछले सात दिनों के दौरान देश में प्रभावित लोगों की संख्या जिस तरह से बढ़ी है, उससे यह आशंका बलवती हो रही है कि स्थिति बिगड़कर बेकाबू न हो जाय।

इसीलिए देश के अधिकतर राज्यों में लॉक डाउन जैसा बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। इसके अलावा ट्रेन व बस सेवाएं तथा घरेलू उड़ानें भी बंद कर दी गई हैं। सचाई तो यह है कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की है। यह काम जितने ठोस रूप से कर लिया जाय, उतना ही सही है। चूंकि विदेश से आने वाले लोगों के माध्यम से इसके फैलने के ज्यादा मामले हैं और उनके सम्पर्क में अन्य लोगों के आने से स्थिति बिगड़ी है, इसलिए उनकी छानबीन के लिए सहज ही सोचा जा सकता है कि कितना बड़ा अभियान चलाना होगा। यह तभी संभव है जब संक्रमण के फैलाव पर रोक लगे जिसके लिए आवश्यक है कि कम से कम लोग एक दूसरे के संपर्क में आएं।

इसी बड़े प्रयास को कुछ लोग हर तरह की रोक का उल्लंघन करके विफल बना रहे हैं। यह अच्छी बात नहीं है। केन्द्र व राज्य सरकारें इस बारे में पूरी तरह सजग हैं कि जनता को कोई कठिनाई न होने पाए, बदली परिस्थितियों में अपरिहार्यता को देखते हुए कुछ दिक्कतें होनी स्वाभाविक हैं लेकिन वह भी कुछ ही दिनों की बात है। इसलिए प्रतिबंधों को लेकर बेचैन होने की कोई भी जरूरत नहीं है। ऐसा करने वाले अपनी मानसिक अपरिपक्वता का ही परिचय दे रहे हैं जो उनके व समाज दोनों के लिए घातक है।

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