Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, October 2
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»खेल

    हौसलों ने फिर से दौड़ना सिखाया: किरण कनौजिया

    By April 8, 2019 खेल No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 823

    किरण कन्नौजिया ने पैर गंवाया पर हौसला नहीं, अपने मजबूत इरादों के बल पर वह देश की पहली महिला ब्लेड रनर बनीं। सलाम है अदम्य साहस की प्रतीक किरण को जिसने हिम्मत के दम पर अपनी कहानी लिखी है।

    Image result for kiran kanojiya
    किरण कनौजिया: ब्लेड रनर

    इतिहास लिखने में जांबाज बेटियों में एक हैं ब्लेड रनर के नाम से मशहूर हो चुकी किरण कनौजिया। एक पैर नहीं तो क्या हुआ। यह बेटी आज उन लोगों के लिए नसीहत है जोकि थोड़ी सी परेशानी में हिम्मत हार बैठते हैं।

    किरण को आज भी याद है कि जब डॉक्टरों ने मेरे परिजनों से कहा था कि इस बेटी की नर्व क्रैश हो गई है और टांग काटनी पड़ेगी। यह घटना 24 दिसम्बर, 2011 में शाम के वक्त हुई और 25 दिसम्बर को उसका जन्मदिन था। वह हैदराबाद से फरीदाबाद आने के लिए ट्रेन में सफर कर रही थी तभी कुछ लड़कों ने उसका सामान छीनना चाहा और खींचतान में वह ट्रेन से गिर गई और उसका पैर रेलवे ट्रैक की पटरियों में फंस गया। किरण की जान बचाने की खातिर उसका एक पैर काटना पड़ा। एक पैर कट जाने के बाद किरण निराश जरूर हुई लेकिन उसने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। पैर कटने के बाद किरण की प्रतिक्रिया थी, मुझे लगा कि जन्मदिन पर फिर नया जन्म मिला है।

    हिम्मती किरण ने आर्टिफिशियल यानी कृत्रिम पैर के सहारे फिर से जिन्दगी के साथ कदम से कदम से मिलाकर चलने की कोशिश शुरू कर दी और जिन्दगी को नई दिशा देने की ठान ली। जिस लड़की को चलने में परेशानी थी उसी लड़की ने मैराथन में दौड़ना शुरू कर दिया और आज वह भारत की महिला बलेड रनर के नाम से शोहरत बटोर रही है। किरण बताती हैं कि डॉक्टर कहते थे कि मैं दौड़ नहीं पाऊंगी, जिन्दगी नॉर्मल नहीं रहेगी। सब कहते थे कि अब तो घर पर ही रहना होगा।

    वह कहती है कि इलाज दौरान वह ऐसे लोगों से मिली जिन लोगों की टांगें ही नहीं थीं, हाथ नहीं थे। हम सब लोगों ने मिलकर मैराथन में भाग लेने की सोची। किरण ने धीरे-धीरे दौड़ना शुरू किया। पहले पांच किलोमीटर, फिर 10 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया। किरण ने बताया कि मुझे लगा कि अगर मैं पांच या 10 किलोमीटर दौड़ सकती हूं तो इससे ज्यादा दौड़ने की चुनौती भी स्वीकार कर सकती हूँ।

    आखिरकार मैंने अपने आपको हाफ मैराथन के लिए चैलेंज किया यानी 21 किलोमीटर दौड़ने का निश्चय किया। मुझे इससे कोई मतलब नहीं था कि मैं कितने समय में मैराथन खत्म करती हूं। बस मुझे रेस पूरी करनी थी। हैदराबाद हाफ मैराथन मैंने साढ़े तीन घंटे में पूरी की, दिल्ली की रेस दो घण्टे 58 मिनट में और मुंबई मैराथन दो घण्टे 44 मिनट में। किरण बताती हैं कि हर किसी का कोई न कोई प्रेरणादायी होता है। मैंने विवादों में घिरे दक्षिण अफ्रीकी धावक ऑस्कर पिस्टोरियस से प्रेरणा ली। किरण बताती हैं, आर्टिफिशियल पैर लगने से इंसान शुरू में एकदम बच्चा बन जाता है। दिमाग को शुरू में पता नहीं होता कि हमारे पास कृत्रिम पैर है। सच कहें तो कृत्रिम पैर की आदत डालने में वक्त लगता है।

    किरण बताती हैं कि शुरू शुरू में मुझे हमेशा डर रहता कि हम गिर जाएंगे। एक-एक कदम रखना बिल्कुल बच्चों की तरह सिखाया जाता है। यह एकदम एक नई जिन्दगी की तरह हो जाता है। किरण कहती हैं कि अब वह भूल गई हैं कि उनके पास आर्टिफिशियल पैर है क्योंकि अब दिमाग ने इसे अपना लिया है।

    अपनी मुश्किलों के बारे में किरण बताती हैं कि शुरू-शुरू में दौड़ना मुश्किल था। दौड़ने के लिए एक अलग क़िस्म का ब्लेड होता है। यह ब्लेड हमें सपोर्ट देता है, शरीर को आगे की ओर धकेलने में। आगे की ओर धकेलने की वजह से हम शरीर को और उठा सकते हैं। इस सब के कारण टांग पर काफी दबाव पड़ता है और ये थोड़ा दर्दनाक होता है मगर बिना दर्द के कुछ मिलता भी नहीं है। समय के साथ-साथ हमें सब कुछ सहना पड़ता है लेकिन सच कहें तो दर्द के बाद ही खुशी भी मिलती है। अब किरण लगातार मैराथन दौड़ती हैं। वह कहती हैं कि उन्हें अपने पिता और अपनी कम्पनी इंफोसिस का काफी साथ मिला। किरण बताती हैं कि कृत्रिम पैर उन्हें कम्पनी की ओर से ही मिली है।

    दुर्घटना के बाद जब किरण पहली बार दफ़्तर लौटीं तो किरण के शब्दों में उनके दोस्तों की प्रतिक्रिया कुछ यूँ थी, जब मैं ऑफिस गई तो लोगों ने कहा कि तुम तो बिल्कुल नॉर्मल लग रही हो। हमें लगा कि तुम छड़ी के सहारे गिरती-लटकती आओगी, तुम्हें देखकर हमारी इच्छाशक्ति और दृढ़ हो गई है। किरण बताती हैं कि मैं जिन्दगी में शायद भूल गई थी कि मैंने जन्म क्यों लिया है और जिन्दगी का क्या मकसद है लेकिन अब मुझे जिन्दगी जीने का जज्बा मिल गया है। मैं अपने काम के साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ कर रही हूँ।

    फरीदाबाद की रहने वाली किरन हमेशा से ही फिटनेस के प्रति काफी सजग थीं, ऐरोबिक्स किया करतीं थीं। 6 महीने के लंबे अंतराल के बाद वो उठीं तो लेकिन उठते ही गिर पड़ी, उन्हें फिर अस्पताल ले जाया गया और वहां एक ऑपरेशन हुआ। डॉक्टरों ने दौड़-भाग न करने की सख्त हिदायत दी। नए सिरे से अपनी जिंदगी को आगे बढ़ाने का प्रण लिए किरण सब कुछ भुला देना चाहती थी। उन्होंने एमसीए किया है और हैदराबाद की इंफोसिस कंपनी में कार्यरत हैं।  चूंकि किरण घर की सबसे बड़ी बेटी थीं इसलिए परिवार के प्रति वो अपनी जिम्मेदारी को समझतीं थी। वापस नौकरी करने गईं जहां उन्हें उनके साथियों ने पूरा सहयोग दिया।

    Kiran kanojia in Mumbai

    हैदराबाद में उन्हें अपने जैसे कई लोग मिले किरन दक्षिण रिहेबलिटेशन सेंटर गईं और वहां उन्होंने देखा कि लोग रनिंग के लिए ब्लेड का प्रयोग कर रहे थे। फिर क्या था वहां के डॉक्टर्स ने उनका बहुत हौंसला बढ़ाया और उन्हें ब्लेड को प्रयोग करने के लिए कहा। ब्लेड को लगाने के बाद किरन ने देखा कि वो अब आसानी से भाग सकतीं थीं। वो धीरे-धीरे दौड़ने की प्रैक्टिस शुरू करने लगी। खुद को कामयाब होता देख अब चींजें आसान होने लगी। उन्होंने भी आर्टीफिशल लेग का प्रयोग शुरू किया।

    – श्रीप्रकाश शुक्ला से साभार

    Keep Reading

    Aman Sehrawat Receives Major Brand Recognition After Winning Olympic Bronze

    ओलंपिक कांस्य के बाद अमन सहरावत को मिला बड़ा ब्रांड सम्मान

    Indian women storm the Asiad final; Sri Lanka set a target of 217 runs; Mandhana and Shafali get off to an explosive start, while Richa Ghosh wreaks havoc.

    एशियाड फाइनल में भारतीय बेटियों का तूफान, श्रीलंका को मिला 217 रन का लक्ष्य, मंधाना-शेफाली की धुआंधार शुरुआत, ऋचा घोष ने बरपाया कहर

    Haryana’s Sakshi Chaudhary shines with Virat Kohli’s support; lands a 'golden punch' at the Commonwealth Games.

    विराट कोहली की मदद से चमक उठी हरियाणा की बेटी साक्षी चौधरी, कॉमनवेल्थ में मारा गोल्डन पंच

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Yogi's 'Janta Darshan': Listened to grievances, issued instructions, and distributed toffees to children.

    योगी का जनता दर्शन: समस्याएं सुनीं, निर्देश दिए, बच्चों को बांटीं टॉफियां

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    Razorpay के व्यापारी अब बिना कार्ड विवरण दर्ज किए और OTP का इंतज़ार किए ऑनलाइन व स्टोर में Apple Pay स्वीकार कर सकते हैं

    October 1, 2026
    Nyrraa M Banerji’s Glamorous Style in Front of the Camera

    हर फ्रेम में छाईं न्यारा एम बनर्जी, दिखा स्टाइलिश अंदाज

    October 1, 2026
    Aman Sehrawat Receives Major Brand Recognition After Winning Olympic Bronze

    ओलंपिक कांस्य के बाद अमन सहरावत को मिला बड़ा ब्रांड सम्मान

    October 1, 2026
    "Books focus the mind and connect it with traditions" - Brajesh Pathak; Isha-Misha Ratan's Kathak performance captivated the audience

    ‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन

    October 1, 2026
    Youth dies after venomous insect bite; family delayed seeking medical help by relying on faith healing; he breathed his last on the way to the hospital.

    जहरीले कीड़े के काटने से युवक की मौत, झाड़-फूंक में उलझा रहा परिवार,रास्ते में तोड़ा दम

    October 1, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading