ग्लासगो की धरती पर भारतीय झंडे ने एक बार फिर गर्व से लहराते हुए साबित कर दिया कि जब जज्बा हो तो इतिहास भी झुक जाता है। शनिवार को मुक्केबाजी रिंग में बरसे सात स्वर्ण पदकों ने न सिर्फ राष्ट्रमंडल खेलों का रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि देश की कुल झोली को 13 स्वर्ण और 39 मेडल तक पहुंचा दिया। वहीं भाला फेंक के मैदान पर नीरज चोपड़ा ने चांदी की चमक बिखेरकर एक बार फिर साबित किया कि वे दबाव में भी दिग्गज हैं।
मुक्केबाजी में स्वर्णिम पंच, सात गोल्ड से नया इतिहास
भारतीय मुक्केबाजों ने अपने अभियान का समापन अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ किया। महिला वर्ग में विश्व चैंपियन जैसमीन लंबोरिया (57 किलो), प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो), अरुंधति चौधरी (70 किलो) और प्रिया घंघास (60 किलो) ने शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण जीते। ओलंपिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन को 75 किलो में रजत से संतोष करना पड़ा।
पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच (60 किलो) और अंकुश पंघाल ने भी खिताब अपने नाम किए, जबकि जादूमणि सिंह व नरेंदर बेरवाल ने रजत पदक हासिल किए। कुल सात स्वर्ण और तीन रजत के साथ यह किसी भी देश द्वारा एक कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी में अब तक का सबसे बड़ा स्वर्ण संग्रह बन गया। 2018 गोल्ड कोस्ट के तीन स्वर्ण की तुलना में यह छलांग वाकई अद्भुत है।
नीरज चोपड़ा का भाला फिर गूंजा, चांदी से सजा मंच
उधर एथलेटिक्स ट्रैक पर ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने पुरुष भाला फेंक फाइनल में 85.83 मीटर की शानदार थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया। श्रीलंका के रुमेश पथिरागे के रिकॉर्ड तोड़ 89.75 मीटर के आगे वे दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन साथी याशवीर सिंह के कांस्य (85.41 मीटर) के साथ भारत ने भाला फेंक में दोहरा मंच हासिल कर इतिहास रच दिया। चोट से लौटकर भी नीरज की यह स्थिरता और लड़ाकू अंदाज भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का पल था।
एसएसी एरेना में ‘भारत माता की जय’ और ‘इंडिया इंडिया’ के नारों के बीच मुक्केबाजों को मिला घर जैसा समर्थन और नीरज की थ्रो – दोनों ने मिलकर ग्लासगो को भारतीय उत्साह से सराबोर कर दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की यह स्वर्णिम लहर अभी थमने वाली नहीं है। – प्रस्तुति : शगुन न्यूज़ इंडिया डॉट कॉम टीम







