वजूद की लड़ाई हैं दोस्तों, मैं अपने ज़िंदा होने को कैसे साबित करूँ ! मिर्जापुर की तहसील सदर क्षेत्र के अमोई गाँव निवासी भोला है। इनको प्रशासन ने मृतक घोषित कर दिया है। यह अपने जिंदा होने की बात कलेक्ट्रेट में बड़े बड़े अक्षरों में लिख कर साहब मैं जिंदा हूँ साहब मैं आदमी हूँ भूत नही बता रहे है।
बताया जाता हैं कि भोला तहसील के कर्मचारियों से परेशान है तहसील प्रशासन ने भोला को मृत दिखा दिया। इनकी सारी जमीन इनके भाई के नाम वरासत कर दिए। इसलिए इनको कहना पड़ा साहब हम जिंदा है।

वास्तव में यह इंसान की दुखभरी कहानी का एक और जीता जागता उदाहरण है, देखते हैं अभी और न जाने कितनी कागज की कहानी और बननी बाकी हैं ?
- ट्विटर पर लोगों का रिएक्शन: आज़मगढ़ की कागज कहानी के बाद पूर्वांचल के ही मिर्ज़ापुर की एक और कहनी …..! -आशीष सेवार्थ
- आजादी के इतने साल भी फ़िल्म कागज में दर्शायी गई बाते भी इस आधुनिक समय मे सत्य है तो फिर अब सोचने वाली बात यह है कि उस समय से आज तक मे हम कितना आगे बढ़ सके है। -अतुल तिवारी







