इंसानियत न छोड़े, अगर कोई छोड़े तो उसे समझाने का प्रयास करें: राज्यपाल

0
718

राज्यपाल ने मोहर्रम पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया

लखनऊ 23 सितम्बर: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज ‘नार्थ इण्डिया जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन’ एवं ‘वन वायस’ के संयुक्त तत्वावधान में राज्य ललित कला अकादमी कैसरबाग में आयोजित 9वीं अंतर्राष्ट्रीय मोहर्रम फोटो और पेन्टिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रो. शारिब रूदौलवी, प्रो. शाबरा हबीब, स्वामी सांरग, शाह हसनैन बकई, श्री हेमन्त तिवारी, नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे। राज्यपाल ने इस अवसर पर सुश्री रूबीना जावेद मुर्तजा, जाॅनथन व रोजी हाकिम, श्री राकेश त्रिपाठी व एवं डाॅ. जैन को शाॅल, अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
राज्यपाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘इमाम हुसैन के बारे में क्या कहूं, मेरे मन में उनके प्रति बहुत श्रद्धा है। इमाम हुसैन जैसे व्यक्तित्व को एक धर्म में नहीं बांधा जा सकता। उनको समाज और धर्म में बांधना उचित नहीं है। वे किसी एक धर्म के इमाम न होकर सबके हैं। श्रद्धा से खिलवाड़ करना मानवता विरोधी है। मानवता की दृष्टि से विचार करना चाहिए और अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार एकजुट होकर भाईचारे का माहौल बनायें। इंसानियत न छोड़े, अगर कोई इंसानियत छोड़े तो उसे समझाने का प्रयास करें। कर्म और वाणी से किसी को पीड़ा देना धर्म नहीं होता। सबको साथ लेकर सद्भावपूर्वक चलना ही आज की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि यही इमाम हुसैन के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी।
श्री नाईक ने बताया कि रविन्द्र नाथ टैगौर ने कहा था कि ‘इंसाफ और सच्चाई को जिंदा रखने के लिए फौजों की जरूरत नहीं होती है। कुर्बानियाँ देकर भी जीत हासिल की जा सकती है, जैसा इमाम हुसैन ने कर्बला में किया।’ डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि इमाम हुसैन की कुर्बानी किसी एक कौम या मुल्क तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों में भाईचारे का एक असीमित राज्य है। पूर्व राज्यपाल श्रीमती सरोजिनी नायडू ने कहा था कि मैं मुसलमानों को इसलिए मुबारकबाद पेश करती हूँ कि उनके बीच दुनिया की सबसे बड़ी हस्ती इमाम हुसैन हैं जो सम्पूर्ण रूप से दुनिया भर की तमाम जाति और समूह के दिलों पर राज करते हैं।
राज्यपाल ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यह चित्र प्रदर्शनी एकता का संदेश देती है। करीब 30 से 40 प्रतिशत चित्र उन लोगों ने बनाएं हैं जो मुस्लिम नहीं हैं। उदार चरित्र वाला व्यक्ति दुनिया को एक परिवार मानता है। राज्यपाल ने छाया पत्रकार की बात करते हुए कहा कि कभी-कभी लिखने वाला एक हजार शब्दों में, बोलने वाला चार सौ शब्दों में, वह नहीं कह पाता जो भाव एक चित्र के माध्यम से व्यक्त होता है। उन्होंने कहा कि चित्र बोलते हैं।
प्रो. शारिब रूदौलवी ने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत का पैमाग दिया है। सामाजिक बुराईयों को दूर करने के लिए उन्होंने कुर्बानी दी। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी इंसानियत के लिए है।
स्वामी सांरग ने कहा कि इमाम हुसैन सबके लिए श्रद्धा के पात्र हैं। हिन्दू, मुस्लिम व अन्य धर्म के लोग भी उनके अनुयायी हैं। कोई मजहब बुरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को मायने दिया है।
श्री हेमन्त तिवारी वरिष्ठ पत्रकार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इमाम हुसैन की याद दहशतगर्दी से लड़ने की ताकत देती है। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से सभी वर्गों में एकता मजबूत होगी।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. शाबरा हबीब ने किया।
Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here