नवेद शिकोह
लखनऊ,02 जुलाई 2019: भाजपा का पत्रकारों से रिश्तों का प्रबंधन बेजोड़ है। पहले बड़ों को साधा गया और अब छोटों को अपना बनाया जा रहा है। ये अच्छी बात है। लेकिन इससे भी अच्छी बात ये है कि भाजपा ने किसी भी क़िस्म के दलाल पत्रकार से परहेज करने की नीति अपनायी है।
6-7 बरस पूर्व यानी सरकार मे आने से पहले ही ख़ास पत्रकारों से क़रीबी रिश्तों के लिए भाजपा मशहूर हुई थी। जो सिलसिला जारी रहा। भाजपा अब आम पत्रकारों से रिश्ता क़ायम करने के आम दावतें और आम की आम दावतें करने लगी है।लखनऊ जिला अध्यक्ष ने होटल क्लार्क अवध में मंगलवार ( 2जुलाई) को पत्रकार मिलन समारोह में आम की दावत दी है।
गौरतलब है कि भाजपा सरकार का पत्रकारों से बर्ताव पर निम्न चर्चाएं होती रही हैं-
- देश के ज्यादातर बड़े मीडिया समूहों से सरकार/भाजपा का सीधा रिश्ता रहा इसलिए बड़े पत्रकारों को भी खुदबखुद भाजपामय होना पड़ा।
- भाजपा सरकार ने सबसे नेक ये काम किया कि छोटे-बड़े सभी दलाल पत्रकारों की छोटी-बड़ी दलाली बंद कर दी। पिछली सरकारों में दलाली करने के लिए बदनाम सभी दलाल पत्रकारों को मुंह नहीं लगाया।
- मुख्य खबर ये है कि अब उत्तर प्रदेश में भाजपा संघर्षरत आम पत्रकारों को सम्मान दे रही है। आम और ईमानदार पत्रकारों से किसी ना किसी रूप से रिश्ता क़ायम किया जा रहा है। छोटे अखबारों के पत्रकारों की रोज़ी रोटी चलती रहे इसलिए छोटे अखबारों को सूचना विभाग सहयोग स्वरूप पर्याप्त विज्ञापन दे रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने तमाम संघर्षशील, मेहनती और ईमानदार छवि के दर्जनों आम पत्रकारों को सम्मानित किया। पिछले साल की तरह भाजपा की लखनऊ इकाई ने आज आम पत्रकारों को आम दावतनामा देकर आम की आम दावत दी।
इस तरह की दावत कोई नयी बात नहीं है। हर राजनीति दल किसी ना किसी बहाने पत्रकारों की दावतें करके मीडिया से मधुर संबंध बनाने की जुगत करती रही है। यूपी में बसपा को छोड़कर कर सपा और कांग्रेस ने सरकार में रहते या ना रहते पत्रकारों से मधुर संबंध बनाने की हर संभव कोशिश की है। हांलाकि बसपा नेता भी पत्रकारों को चाय और खाने की दावते देते रहे हैं। बसपा सुप्रीमों मायावती ने अपनी ज्यादातर प्रेस वार्ता का समय लंच टाइम रखा, ताकि मीडिया कर्मियों को दोपहर का भोजन खिलाया जा सके।
सपा तो मीडिया को तरह तरह से लाभ पंहुचाने के लिए ख़ूब चर्चा मे रही है। इसी तरह कांग्रेस ने भी दावतों की संस्कृति को खूब आगे बढ़ाया। लखनऊ में कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ( पूर्व.एमएलसी) का आम का एक बाग़ पत्रकारों को नज्र कर दिया जाता है।
एक दिलचस्प चर्चा ये भी है कि लखनऊ के कथित सपाई पत्रकार जो सपा कार्यालय में पूरा दिन काट देते थे। वो कांग्रेसी पत्रकार जो मेहदी साहब और तमाम कांग्रेसी नेताओं की दावतें खाते थे अब अपने पुराने सियासी प्यार से बेवफाई करके सत्तानशीन भाजपाईयों के आगे पीछे दौड़ा करते हैं।






