Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 545 सबरी जैसी जोहती राम तुम्हारी राह। है अभाव तो क्या हुआ सजा है वन्दनवार।। बेर सहेजे बैठी है आंखें हैं बेहाल। कृपा करो एक बार जो स्वागत व सत्कार।। – दिलीप अग्निहोत्री