त्यौहार बीत गये, आ, चल काम पर लौट चलें

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त्यौहार बीत गये। आ, चल काम पर लौट चलें।
सबकी कहानी छापें।
जिसकी छप गयी है, उसकी बेचें।
आ काम पर लौट चलें।
आ काम पर लौट चलें।
किताब पढ़ेगा कौन
जनता है मौन
आ किताब लिख-लिख कर छापें
आ लोकार्पण करें
आ जुगाड़ लगाएं पुरस्कार की
आ काम पर लौट चलें।
कुछ भी लिखें
जैसे-तैसे जो भी हो लिखें
आ लिख-लिख कर कंप्यूटर की मेमोरी भर दें
आ तू भी आ
आ तू भी आ
दोस्त बस तू रुक जा
जा अमेजन पर डाल रिव्यू
हमारी है बेस्ट बस तू कह दे
फेबु पर यार थोड़ा-सा लिख दे
आ काम पर लौट चलें!
– हरेप्रकाश उपाध्याय

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