धरती ने ओढी धानी चुनर,
नारी ने पहनी धानी चुनर,
कोयल ने कूक लगाई है,
सबको यह बात बताई है,
आया सावन झूम झूम के।
गाए रे मन झूम झूम के।।

पेड़ों में झूले पड़ गए हैं,
बच्चो की पेगे बढ़ गए है,
मेहदी की सुगंध है छाई रे
दुल्हन ने नीद उडाई रे,
आया सावन झूम झूम के।
नाचे रे मन झूम झूम के।।
-निहारिका पांडेय







