Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 587 कारे कारे बादरा, उमड़-घुमड़ रह जाएं। गरजे पर बरसे नहीं, नाहक जिया जरायें।। नाहक जिया जरायें, बादरा मानसून के, सांसत में है जान, ना आए पल सुकून के, नेताओं की तरह, तुम्हारे लक्षन सारे। हाथी के दांत बादरा कारे कारे।। -सीएम त्रिपाठी
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Lovely sentiments.