Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 614 कौन किसी से कम यहां, सब हैं तीरंदाज। बैठी है बारूद पर, दुनिया देखो आज।। दुनिया देखो आज, किसी पल क्या हो जाएं, एक पलीता लगे, और स्वाहा हो जाएं, साया अपना मगर, आज डर लगे उसी से। सब हैं तीरंदाज, यहाँ कम कौन किसी से।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन