अजातशत्रु

0
846
अजातशत्रु अटल
निश्छल भाव प्रबल।।
समाज और राष्ट्र के लिए
निःस्वार्थ समर्पण।।
अजातशत्रु अटल।।
सुहृदय कवि
संवेदना का चिंतन-मनन।
राजधर्म का सुदृढ निर्वाहन
पोखरण का बल
प्रतिबन्धों से बेअसर
बढ़ते रहे कदम।।
अजातशत्रु अटल।।
चतुर्भुज-मार्ग- प्रशस्त
शीर्ष विकास दर
अनवरत।
अजातशत्रु अटल।।
राजनीति में रहकर
बेदाग। किसी से नहीं था वैमनस्य।
ज्यों की त्यों धर गए चादर।
जन मन में सदा जीवंत।
प्रेरणा -प्रबल।
कारगिल विजय पथ।
अजातशत्रु अटल।।
– दिलीप अग्निहोत्री
Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here