कोरोना: जीने का अब देखिए, बदल गया अंदाज

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जीने का अब देखिए, बदल गया अंदाज॥
बदल गया अंदाज, गुम हुई हँसी-ठिठोली,
बच्चे, बूढ़े, जवां, बंद है सबकी बोली,
जिस घर में घुस गया, मच गया रोना-धोना।
हटो-बचो का शोर, आ गया है कोरोना।


किसकी है औकात, खोलकर मुंह दिखलाए

कोरोना के काल में, इंसां या भगवान।
आज सभी की गुम हुई, चेहरे की पहचान ॥
चेहरे की पहचान, सभी हैं मास्क चढ़ाए,
किसकी है औकात, खोलकर मुंह दिखलाए,
करते भक्त गुहार, प्रभूजी साफ कहो ना।
क्या तुमसे भी बड़ा, हो गया है कोरोना॥
कोरोना ने कर दिया, जीना मुश्किल आज।


दुश्मन हो या दोस्त, बात से है क्या डरना

क्या डरना किस बात से, करें पेट भर बात।
बात बने या ना बने, कर लेंगे हर बात ॥
कर लेंगे हर बात, बात में बात उठाएं,
चले जहां से वहीं, लौटकर फिर आ जाएं,
बिना बात के बात, बात से है जी भरना।
दुश्मन हो या दोस्त, बात से है क्या डरना॥

  • सी. एम. त्रिपाठी

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