Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 513 आँखों का आँगन सजल, सूना हर परिवेश। जब से दिल का देवता, चला गया परदेश। …………………………………… भूख और भगवान का, ये कैसा उपकार । भावुक परदेशी हुआ, मेरा सुख -संसार । – कमल किशोर ‘भावुक’