Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 542 आँखों का आँगन सजल, सूना हर परिवेश। जब से दिल का देवता, चला गया परदेश। …………………………………… भूख और भगवान का, ये कैसा उपकार । भावुक परदेशी हुआ, मेरा सुख -संसार । – कमल किशोर ‘भावुक’
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन