आँखों का आँगन सजल

0
597
आँखों का आँगन सजल, सूना हर परिवेश।
जब से दिल का देवता, चला गया परदेश।
……………………………………
भूख और भगवान का, ये कैसा उपकार ।
भावुक परदेशी हुआ, मेरा सुख -संसार ।
– कमल किशोर ‘भावुक’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here