Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 566 उसका पल्लू थाम लें, जिससे बनता काम। गयाराम कल तलक थे, अब हैं आयाराम।। अब हैं आया राम, न कल का रहे ठिकाना, किस खेमे में रहे, कहां हो आबूदाना, पक्के तोताचश्म, ना समझो इनको लल्लू। जिससे बनता काम, थाम ले उसका पल्लू।। सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन