Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 555 बालू में पानी का भ्रम दौड़े बदहवास। थके पांव है चलना मुश्किल खाली दोनों हाँथ।। – दिलीप अग्निहोत्री
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन