Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 616 जीवन जीना सीख ले, हर मुश्किल का तोड़। अपने सिर का ठीकरा, दूजे के सिर फोड़।। दूजे के सिर फोड़, सगा हो उसे दगा दे, जिसके बल पर जिए, उसी का लगा दे काम, झूठ बोल भरपेट, सत्य के घूट न पीना। कलयुग का है दौर, सीख ले जीवन जीना।। सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन