सरयू तट पर ज्योति पुंज
हुई अयोध्या धाम
व्याकुलता मन की गई
जय जय जय श्री राम।
मर्यादा स्थापित हुई
पित्रधर्म निर्वाह
केवट सबरी वनवासी
समरसता सद्भाव।।
वैभवशाली लंका थी
अहंकार का नाश
रामराज्य कायम हुआ
जय जय जय श्री राम।।
– दिलीप अग्निहोत्री







