तितली होती है
प्रकृति की वरदान
न जाने कहाँ से लाती है
विविध रंगों की सौगात
कोई तो होता है बेजोड़ चित्रकार
जिसका दिलाती है अहसास।
मासूम,नन्हीं कोमल आकर
बढ़ाती है उपवन की शोभा
इतराती है फूलों पर
मगर होता नहीं कोई भार।
नहीं देती है किसी को संताप
तुम्हें विनाशकारी तूफान के लिए
नहीं मिला था कोई दूसरा नाम
काँपी नहीं तुम्हारी जुबान
नाहक तितली को किया बदनाम।
– दिलीप अग्निहोत्री







