Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 547 पग पग पर तीर्थ हैं मंदिर हैं बहुतेरे खुदा की चौखटें गुरू के द्वार औ ईसा के घर भी हैं बहुतेरे, हर पग से हर साँस से हर आस से कुछ मिलेगा जरूर मिलेगा पर उतना ही जितना तू है अपने भीतर से परमार्थी दयावान …. !!
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन