मसअला मेरी ख़ुदकुशी का है
कौन यूँ भी यहाँ किसी का है
मैं कहाँ बच के निकल सकती हूँ
वासता उसकी दोसती का है
उसकी खुशबू कहीं से आई है
ये हुनर उस की ही गली का है
मुझको किसकी लगन यहाँ लाई
हादसा ये भी दिल लगी का है
मैं हूँ खुद की तलाश में अब तक
अब सवाल आज तिश्नगी का है
उसको उस में ही खोजती हूँ मैं
वो दवा, रोग भी उसी का है
एक दिन फिर से सूर्य निकलेगा
मेरा दावा तो रोशनी का है – आशा शैली







