तीन टाइगर थे।
तीनों बेचारे थे, न ठौर था, ना ठिकाना।
एक दिन तीनों गए, जंगल में रहने के लिए।
वहां देखा पूरा जंगल कटा था,
आबादी थी तो सिर्फ आदमियों की।
सोचा अब कहां जाएं!
तीनों वहीं रहने लगे कुत्तों की तरह,
जब भूख लगी तो वहां उनके लायक कोई जंगली जानवर न मिला।
अब गली में ही आदमी को मारकर खाने लगे,
आदमी ने सोचा यह आदमखोर हो गए हैं,
इन्हे मार देते हैं,
इतने में बीच में वन विभाग आ गया।
बोले जंगली जानवरों के मारने के इल्जाम में,
आप सब को गिरफ्तार किया जाता है।
यह सुनकर सभी हक्का बक्का रह गए।
बोले पर मारा कहां हमने।
सभी तो मार दिए, अब तीन ही बचे हैं।
इनको भी मारने जा रहे थे।
इनका घर भी उजाड़ दिया।
जंगल नस्ट करने से इनके सभी जंगली जानवर गायब हो गए,
यहां तक पशु-पक्षी भी।
पर तब आपका वन विभाग क्या कर रहा था!
जुबान लड़ाते हो, वन दरोगा ने हड़काया।
पर किसी के समझ में कुछ नहीं आया।
एक बोला उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।
चलो इन्हीं शेरों से पूछ लेते हैं इनकी नाइंसाफी के बारे में।
साहब! हमें तो भगवान ने भेजा था।
जीवन चक्र को अनुकूल करने के लिए।
आप लोग ही कहते हैं हमारे रहते तू क्या अनुकूल करेगा।
अब देख मैंने कर दिया, अब सब कण्ट्रोल है।
यह तीनों टाइगर भी कंट्रोल में है।
लेकिन साहब! अब पृथ्वी कंट्रोल में नहीं है।
-सुशील कुमार








1 Comment
दिल को छू लेने वाली कविता बहुत बढ़िया