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    पदम् सम्मान से प्रेरणा

    By March 29, 2018Updated:March 29, 2018 Current Issues 1 Comment6 Mins Read
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    Post Views: 718
     डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
    समाज जीवन के प्रसंगों को प्रेरणा के अवसर में बदलना कोई राम नाईक से सीखे। उनके सुदीर्घ समाज जीवन में ऐसे प्रयोगों की लंबी फेहरिस्त है।
    उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की भूमिका में भी उनकी यह सक्रियता चलती रही है।
    देश के शीर्ष सम्मानों में शुमार पदम् पुरष्कार के प्रसंग को भी वह प्रदेश तक ले आये। यह विलक्षण प्रयोग साबित हुआ।इस माध्यम से समाज के विविध रंग और कार्य व्यापक रूप से चर्चा में आ गए।
    इसमें आर्यो का मूल निवास भारत, संस्कार, लोककला, संगीत, भाषा विज्ञान, व्याकरण, संस्कृत भाषा का वैश्विक महत्व, उर्दू शायरी, राष्ट्रीय एकता, साहस, वीरता, निःस्वार्थ सेवा भाव, आदि अनेक भाव एक साथ उजागर हुए। उत्तर प्रदेश से पदम् पुरष्कार प्राप्त महानुभावों  के राजभवन में सम्मान की परंपरा राम नाईक ने शुरू की थी।
    इस बार पदम् पुरष्कार प्राप्त योगेंद जी, मोहन स्वरूप भटनागर, भागीरथ त्रिपाठी बागीश शास्त्री, और मशहूर शायर अनवर जलालपुरी के अलावा वीरता पुरष्कार प्राप्त बच्ची नाजिया को राजभवन में सम्मानित किया गया।
    इस प्रकार राम नाईक की पहल आगे बढ़ी । इसके पूर्व उनकी प्रेरणा से  पहली बार उत्तर प्रदेश दिवस मनाया गया।  सर्वाधिक मतदान वाले तीन बूथ के अधिकारी, कर्मचारी और ग्राम प्रधान को सम्मानित किया गया था।
    इसी प्रकार पदम्  पुरस्कारों से पुरष्कृत महानुभावों को राजभवन में सम्मानित करने के पीछे दो भाव थे। एक यह कि विभिन्न क्षेत्रों में अप्रतिम कार्य करने वाले महानुभावों के प्रति उत्तर प्रदेश कृतिज्ञता ज्ञापित करे।
    राज्यपाल प्रदेश के संवैधानिक मुखिया होते है। उनके द्वारा दिया गया सम्मान इसी का प्रतीक है। यह भी सराहनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस अवसर पर उपस्थित थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा  राज्यपाल राम नाईक की सकारात्मक और नई सोच प्रेरणा देती है। वह अभिनव कार्य करते है। संसद में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत का गायन, मुम्बई नामकरण, महिला लोकल ट्रेन, संसद निधि, उत्तर प्रदेश दिवस, लोकमान्य तिलक के स्वतन्त्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, उद्घोष का शताब्दी उत्सव, मनाना आदि उन्ही की प्रेरणा से संभव हुआ। एक जनपद एक उत्पाद की घोषणा उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ही हुई थी। भविष्य में यह परम्परा बनी रहेगी।
    श्रेष्ठ समाज में केवल अपने बारे में सोचना सही नहीं होता। यह सन्योग है कि योगी सरकार ने ब्रजक्षेत्र के विकास हेतु प्राधिकरण बनाया है, वही इस दिशा में पिछले छह दशक से कार्य करने वाले मोहन स्वरूप भाटिया को पद्म पुरष्कार मिला। उन्होंने इस भाषा के पांच हजार गीतों का संग्रह किया है।
    योगी आदित्यनाथ ने केंद्र की भाजपा सरकार का आभार व्यक्त किया। वह समाज निर्माण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नींव के पत्थरों को तलाश कर पदम् पुरष्कार से सम्मानित कर रही है।
    राम नाईक ने ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बताया। पदम् पुरष्कार राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में होता है। प्रदेश  के स्तर पर उसकी पर्याप्त चर्चा नहीं होती। लेकिन राजभवन में उनके सम्मान कार्यक्रम से यह कमी दूर हो जाती है।
    राम नाईक ने पदम् पुरष्कार से सम्मानित योगेंद्र जी के बारे में रोचक घटना बताई। पदम् पुरस्कार की सूची में योगेंद जी का नाम मध्यप्रदेश की सूची में था। राम नाईक के मन मे यह बात खटकी। उन्होंने राष्ट्रपति भवन को फोन किया। फिर योगेंद जी को फोन किया। तब जाकर सच्चाई सामने आई। उनका जन्म आगरा में हुआ था।
    राम नाईक ने भाषाविद भागीरथ त्रिपाठी के विषय में भी प्रसंग सुनाया। उनके नाम को भागीरथ की जगह भगीरथ  लिखा गया तो उन्होंने तुरन्त आपत्ति दर्ज कराई थी। बताया कि भ में आ की मात्रा होनी चाहिए। राम नाईक ने अपना उदहारण भी दिया। उनके सरनेम में ई बड़ी मात्रा में है। लेकिन कुछ लोग छोटी आज भी नाइक लिख देते है। भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ने समारोह के बाद विशेष भेंट में बताया कि भगीरथ राजा का नाम था। उन्होंने गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए तपस्या की थी। इसलिए गंगा को भागीरथी कहा गया। एक मात्रा से दोनों में अंतर आ जाता है।
    दूसरा भाव यह कि इन महानुभावों के उत्कृष्ट कार्यो से प्रदेश के लोग, खासतौर पर युवा वर्ग उनसे प्रेरणा ले सके। समारोह में अनेक प्रेणादायक प्रसंग दिखाई दिए।
    मरहूम अनवर जलालपुरी का सम्मान उनके भाई अबुल कलाम जलालपुरी ने ग्रहण किया। उन्होंने अनवर जलालपुरी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। लोग कैसे प्रेरणा लें, इसका जिक्र भी उन्होंने किया।
    अनवर जलालपुरी भी अपने अंदाज में चरैवेति अर्थात चलते रहने पर यकीन रखते थे।
    जिस दिन से चला हूं
    मेरा मंजिल पर नजर है।
    अनवर जलालपुरी ने भगवत गीता के सात सौ श्लोकों का शायरी के रूप में अनुवाद किया।
    इसके पहले वह  गीतांजलि का उर्दू शायरी में तजुर्मा किया।
    तुम प्यार की सौगात लिए
    घर से तो निकलो।
    रस्ते में तुम्हे कोई
    दुश्मन न मिलेगा।।
    उन्होंने राष्ट्रीय व सामाजिक एकता का भी पैगाम दिया।
    नफरत की दीवार
    गिराकर देखो
    दोस्ती की भी रस्म
    निभाकर देखो
    कितना सुख मिलता है 
    मालूम नहीं तुमको 
    अपने दुश्मन को कलेजे से
    लगा कर देखो।।
    राष्ट्रीय एकता के लिए वह फरमाते है
    न तेरा  है न मेरा है
    ये हिंदुस्तान सबका है।
    नहीं समझी गई यह बात
    तो नुकसान सबका है।।
    संस्कार भारती के संस्थापक योगेंद्र जी सदैव सम्मान से दूर रहे । वह नाना जी देशमुख की प्रेरणा से सामाज सेवा में आये थे।  फिर पूरा जीवन इसी में समर्पित कर दिया। आज सरकार में जो लोग है, उनके आग्रह पर पदम् सम्मान  स्वीकार करना पड़ा। उनका यही विचार प्रेणादायक है। वह स्थानीय कलाकारों को पूरे देश मे तलाशते रहे ।उनकी कलाओं को समाज और देश, विदेश के सामने लाते रहे। सबको राष्ट्रवाद के विचार से भी जोड़ते रहे।
    भागीरथ त्रिपाठी ने  संस्कृत भाषा ,और साहित्य के क्षेत्र में विलक्षण कार्य किया है। अमेरिकी विद्वान ने लिखा था संस्कृत में मात्र नौ धातु है। जबकि पाणिनि  का  भाषा ज्ञान व्यापक था। उसमें ग्यारह सौ  धातुएं थी, जो विश्व की अन्य भाषाओं में उपलब्ध है।
    इसके अलावा उन्होंने प्रमाणित किया था कि आर्य कहीं बाहर से नही आये थे। बल्कि आर्य भारत से अन्य देशों में गए। वहां संस्कृत के शब्द प्रचलित है।
    उनका कहना है कि संस्कृत भाषा कठिन नहीं है। इसे मात्र एक सौ अस्सी घण्टों में सीखा जा सकता है। प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ सरजीत सिंह डग न वीरता पुरष्कार विजेता नाजिया के विषय मे जानकारी दी।
    वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है।
    नदिया ने अपनी जान पर खेल कर पहले एक बच्ची को अपहरण से बचाया था। उसके बाद मोहल्ले में अराजकता फैलाने वाले लोगों को गिरफ्तार कराया।
    यह प्रसंग भी प्रदेश के युवा वर्ग के लिए प्रेणादायक है। इस प्रकार यह समारोह सार्थक रहा।
    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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    1 Comment

    1. minecraft on October 4, 2018 1:24 pm

      Thanks in support of sharing such a nice opinion, piece of writing is
      pleasant, thats why i have read it entirely

      Reply
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