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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सामाजिक न्याय का अतिवंचित तक विस्तार

    By March 28, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सामाजिक न्याय के विस्तार का प्रयास करेंगे। उनकी मंशा आरक्षण के लाभ को अतिदलित और अति पिछड़े वर्ग तक पहुंचाने की है। इसका ऐलान उन्होंने विधानसभा में किया। वैसे आरक्षण का विषय संवेदनशील होता है। फिर भी समाज के वंचित वर्ग को इस माध्यम से बराबरी पर लाने की आवश्यकता है।  लेकिन इतने दशक बीतने के बाद भी आरक्षित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा इस सुविधा से वंचित है। यदि इस ओर ध्यान न दिया गया तो सामाजिक न्याय का सपना कभी पूरा नही होगा। यह तथ्य वंचित वर्ग की ओर से उठता तो ज्यादा बेहतर होता। लेकिन यह वंचित वर्ग विकास यात्रा में इतना पीछे छूट गया कि वह आवाज उठाने की जहमत भी नहीं उठा सकता। जिन्हें नौकरी मिल गई, वह प्रमोशन में आरक्षण के लिए तो वर्षो से आंदोलन कर रहे है, आवाज उठा रहे है, किन्तु जिन्हें आज तक आरक्षण नसीब ही नहीं हुआ, उनकी बात उठाने की चिंता नहीं कि गई।
    इस आधार पर राजनीति करने वालों ने भी अतिवंचित वर्ग पर ध्यान देने की कभी आवश्यकता नहीं समझी। यहां तक कि ऐसे दल जब सत्ता में रहे तब उन पर जाति विशेष को ही सर्वाधिक अहमियत देने के आरोप लगे। जबकि सामाजिक न्याय को वास्तविक रूप में न्यायपूर्ण बनाने की आवश्यकता थी। लेकिन इस पर चर्चा की बात तो दूर, सुधार की आवाज उठाने वाले को दी दलित, पिछड़ा विरोधी करार दिया जाता था। यह आवाज इतनी बुलन्दी से उठाई जाती थी, जिसमें अतिदलित और अतिपिछड़ा वर्ग की उपेक्षा चर्चा में नहीं आती थी। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय को गंभीरता से उठाया है।
    उन्होंने कहा कि सरकार आजादी के बाद मुख्यधारा से अलग रहे लोगों और वंचितों को सम्मानजनक अधिकार दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। अतिदलित और अतिपिछड़ों को अलग से आरक्षण दिया जाएगा। आरक्षण में कुछ लोगों का एकाधिकार समाप्त किया जाएगा। सरकार इस पर सुझाव देने के लिए समिति का गठन करेगी। यह भी सन्योग है कि ढाई दशक पहले इसकी पहल भाजपा सरकार ने ही कि थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने हुकुम सिंह की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। इसने पिछड़ा का आरक्षण सत्ताईस से बढाकर अट्ठाइस करने की सिफारिश की थी। इसमें यादवों के लिए पांच प्रतिशत शेष पिछड़ी जातियों के लिए तेईस प्रतिशत आरक्षण का फार्मूला बनाया गया था। इसी प्रकार दलितों में जाटव व उनके उपवर्गों को दस प्रतिशत और अन्य दलितों के लिए ग्यारह प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया था। लेकिन राजनाथ सिंह सरकार को केवल ग्यारह महीने बाद ही सत्ता से हटना पड़ा था। इससे यह मसला अधर में ही रह गया।
    सपा और बसपा की सरकारों ने इस सामाजिक न्याय पर कोई ध्यान नहीं दिया। एक बार फिर योगी आदित्यनाथ ने इसकी कमान संभाली है। उनकी कार्यशैली के आधार पर कहा जा सकता है कि वह इस विषय को अंजाम तक अवश्य ले जाएंगे। ऐसा नहीं कि यह देश में पहली बार होगा। देश के ग्यारह प्रदेशों में अति पिछड़ों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्राप्त है। बिहार, हरियाणा, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, पांडुचेरी,  प.बंगाल, केरल और जम्मू कश्मीर में यह व्यवस्था की जा चुकी है।
    यह अजीब है कि उत्तर प्रदेश सपा- बसपा को पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने का अवसर मिला लेकिन अति पिछड़ा और अति दलित कभी इनके एजेंडे में नहीं रहा। यह किसी विरोधी के आरोप नहीं है।
     जब सपा सत्ता में थी तब बसपा उस पर जातिविशेष को ही प्रत्येक स्तर पर अहमियत देने का आरोप लगाती थी।   इसमेम अतिपिछड़ा कहीं नहीं थे। बसपा सत्ता में थी तब सपा उस पर जति विशेष की हिमायत का आरोप लगाती थी।   बसपा की मेहरबानी अति दलितों के लिए नहीं थी। आज दोनों पार्टी गठबन्धन को बेताब है, लेकिन उनकी चिंता में आज भी अतिपिछड़ा और अति दलित नहीं है। बिहार में राजद ने पन्द्रह वर्ष शासन किया।लेकिन उस दौर में अति पिछड़ा और अति दलित हाशिये पर रहे। यह आरोप लगाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ही थे, जो आज राजद के साथ है। शरद यादव अपने को सामाजिक न्याय का पुरोधा मानते है। लेकिन उनके एजेंडे में अति पिछड़ा और अति दलित हैं है। कुछ दिन पहले वह लखनऊ आये थे। वह पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक आदिवासी मंच के सम्मेलन में शामिल हुए। यहां भी वोटबैंक बनाने की कवायद हुई, अति दलित अति पिछड़ा की ओर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं समझी गई।
    कुछ समय पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायधीश ने भी कहा था कि दलित और पिछड़ा वर्ग की एक जाति विशेष आरक्षण कोटे के पूरा लाभ ले चुकी है। इस मुद्दे पर सरकार को विचार करना चाहिए। इसमें भी लगातार कई पीढ़ी से आरक्षण का लाभ उठाने वाला एक वर्ग तैयार हो चुका है। यह कहीं से भी पिछड़ा या दलित नहीं है। लेकिन आरक्षण के नाम पर वह वंचित वर्ग का हिस्सा ले रहे है। कम जे कम इन मसलों पर चर्चा तो होनी चाहिए। यह अच्छा है कि योगी आदित्यनाथ ने आलोचनाओं की चिंता किये बिना इस दिशा में कदम बढ़ाया है।
    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

    #UP government #yogi adittyanath

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