डॉ दिलीप अग्निहोत्री
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैंक्रो ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह महादेव और माँ विंध्यवासिनी की नगरी की यात्रा करेंगे। लेकिन नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में ऐसे तत्व भी शामिल रहते है। वह विंध्याचल के पास छानबे ब्लाक गए। यहां विंध्याचलधाम की चुनरी से उनका स्वागत किया गया। यहाँ से वह दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी भोले बाबा की काशी पहुंचे। गंगा में नौका विहार किया। हर हर महादेव का परंपरागत उद्घोष होता रहा। चौरासी घाटों पर भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप दिखाई दिया।फ्रांस, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों ने इसका सजीव प्रसारण देखा। अपने राजनीतिक जीवन में वह दुनिया के अनेक स्थानों पर गए होंगे, लेकिन वसुधा को कुटुंब समझने वाली ऐसी संस्कृति के दर्शन उनको कहीं नही हुए होंगे। बहुत संभव है कि नरेंद्र मोदी भारत की इस दार्शनिक धरोहर से दुनिया को परिचित कराना चाहते है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसका पहला चरण था। इसके पहले जापान के प्रधानमंत्री भी काशी आये थे। वह नरेंद्र मोदी के साथ गंगा आरती में शामिल हुए थे।

इसके पहले नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच उपयोगी वार्ता हुई। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहित चौदह अहम समझौते हुए। दोनों देश एक दूसरे के जंगी जहाजों के लिए अपने नौसैनिक अड्डे खोलने के लिये राजी हुए। रक्षा और सामरिक जानकारी की उचित गोपनीयता भी कायम रखी जायेगी। जिससे अन्य देश उसका लाभ न उठा सके। जाहिर तौर पर यह सहमति चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के मद्देनजर बनाई गई है। इन सामुद्रिक और सामरिक समझौतों से चीन की विस्तारवादी चाल का मुकाबला किया जा सकेगा। अनुमान है कि निकट भविष्य में अमेरिका का सहयोग भी भारत और फ्रांस के इस कदम को मिलेगा।इतना ही नहीं दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल और साजोसामान का आदान प्रदान भी कर सकेंगे। युद्ध अभ्यास, प्रशिक्षण,आपदा राहत कार्यो में दोनों देश सहयोग करेंगे। इसके अलावा शिक्षा,पर्यावरण, शहरी विकास, पर्यावरण, रेलवे, सौरऊर्जा, के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर अमल किया जाएगा।
फ्रांस पर भी कई बार आतंकी हमले हो चुके है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिक क्षेत्र में आपसी सहयोग तेज किया जाएगा। इसका प्रयोग समुद्री क्षेत्र में किया जाएगा। परमाणु सहयोग के तहत जैतापुर संयंत्र का कार्य जल्दी पूरा करने का करार हुआ।यहाँ छह परमाणु संयंत्र लगाए जाएंगे। इसकी क्षमता सोलह सौ पचास मेगावाट होगी। महाराष्ट्र के तट पर बनने वाला यह देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क होगा। दोनों देशों का व्यापार अगले कुछ वर्षों में पन्द्रह अरब यूरो तक पहुंच जाएगा। इसका रोडमैप बना लिया गया है। दोनों देशों की कम्पनियों ने अलग से पन्द्रह अरब डॉलर के समझौते किये।

मिर्जापुर को बड़ी सौगात मिली। इससे बिजली समस्या का समाधान होगा। फ्रांस के सहयोग से यह प्लांट बना है।
मिर्जापुर जिले के छानवे ब्लॉक के दादरा कला में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया गया। छह सौ पचास करोड़-करोड़ रुपए की लागत से फ्रांस की कंपनी द्वारा स्थापित गया। इसकी क्षमता पचहत्तर मेगावाट है। इसे सौ मेगावाट तक बढ़ाया जाएगा। तीन सौ बयासी एकड़ में बने इस संयंत्र से पांच लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अनेक अर्थों में उपयोगी साबित हुई। इससे द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में बहुत सुधार हुआ। आपसी सहयोग आगे बढ़ा।चीन की विस्तारवादी गतिविधियों के विरोध में फ्रांस भी आ गया है। इस्लामी आतंकवाद से फ्रांस भी सुरक्षित नहीं रहा है। दोनों देश इसके विरोध में साझा नीति बनायेगें। इसका भी सकारात्मक प्रभाव होगा। भारत की मानवता और शांतिवादी संस्कृति को फ्रांस के राष्ट्रपति ने स्वयं देखा। वह इससे प्रभावित भी हुए। संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्य्ता के लिए फ्रांस भारत का समर्थन करेगा। इस प्रकार इस यात्रा ने दोनों देशों के संबन्ध प्रगाढ़ किये है।
.लेखक वरिष्ठ पत्रकार है







