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    भव्य कुम्भ में लोककल्याण के निर्णय

    By January 31, 2019 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    कुंभ का ऐतिहासिक महत्व विश्व प्रसिद्ध है। इस प्रकार का आयोजन अन्यत्र कहीं भी नहीं होता है। यह उचित है कि प्रत्येक सरकारें अपने स्तर से इसके निर्वाध और सकुशल आयोजन का प्रयास करती है। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार यहीं तक सीमित नहीं रखा। उसने अपने को भावनात्मक रूप से भी कुम्भ से जोड़ा है। यह अंतर तैयारियों में भी दिखाई दिया। पूरे मेला क्षेत्र और आवागमन के मार्गो पर भव्यता देखी जा सकती है। मुख्यमंत्री अनेक बार प्रयागराज गए, सभी तैयारियों को स्वयं देखा। उनके निर्देश पर अनेक प्रकार के सुधार किए गए। तैयारियों का प्रारंभ ही हिन्दू जनभावना के अनुरूप था। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया।
    सरकार के प्रयासों से पहली बार किले में हनुमान जी और सरस्वती कूप के दर्शन की व्यवस्था की गई। यह कार्य पहले भी हो सकते थे। लेकिन इसके लिए अपेक्षित इच्छाशक्ति का अभाव था। योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए प्रयास किये। इतना ही नहीं योगी ने अपनी कैबिनेट की बैठक प्रयागराज में करके बड़ा सन्देश दिया है। सामान्यतः सरकार के प्रवक्ता मंत्रीगण बैठक के निर्णयों की जानकारी मीडिया को देते है। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री और उनके दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने यह जिम्मेदारी संभाली। कैबिनेट बैठक में विकास और संस्कृति का सामंजस्य था।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की यहां पर सम्पन्न कैबिनेट बैठक का केंद्र बिंदु प्रयागराज ही था। प्रयागराज की  कनेक्टिविटी के लिए गंगा एक्सप्रेस वे प्रस्तावित किया गया है। फोर लेन वाला यह एक्सप्रेस वे विश्व का सबसे लंबा एक्सप्रेस वे होगा। यह पश्चिमी यूपी को प्रयागराज से जोड़ेगा। छह सौ किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस वे मेरठ से प्रयागराज तक बनेगा। यह एक्सप्रेसवे मेरठ, अमरोहा, बुलंदशहर, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज आएगा। यह एक्सप्रेसवे जब बनेगा तो दुनिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे होगा।
    इस एक्सप्रेसवे के लिए साढ़े छह हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। फोर लेन एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस वे का छह लेन तक विस्तार किया जा सकेगा। इसके बाद में छह लेन में परिवर्तित किया जाएगा। यह एक्सप्रेस वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रयागराज से जोड़ेगा। योगी ने कहा कि अनेक कारणों से इस बार का प्रयागराज कुंभ अनोखा है। पिछले कुंभ की तुलना में काफी कुछ बदल गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास समय कम था, फिर भी निर्मल, अविरल गंगा का रूप प्रधानमंत्री की ही दूरदर्शिता का प्रमाण है।
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रयागराज में हैं तो स्वभाविक रूप से हमारी कैबिनेट का केंद्र भी यहीं है। इसके साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के गोरखपुर लिंक को भी कैबिनेट ने सहमति दी है। इक्यानवे किलोमीटर के इस के लिंक पर साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसका काम तेज गति से चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि हाल ही में रिलीज हुई फिल्म उरी को उतर प्रदेश करमुक्त किया गया है।
    बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे को भी सहमति प्रदान की गई है। यह दो सौ छियानबे किलोमीटर लम्बा एक्सप्रेस वे है। इसके निर्माण पर साढ़े आठ हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च होंगे। इसके साथ छतीस सौ  हेक्टेयर जमीन की वैदिक संस्कृत को रामायण के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज की  प्रतिमा की स्थापना उपरांत पार्क का सौंदर्यीकरण किया गया है। यहां पर सरकार अब महर्षि भारद्वाज आश्रम का भी भव्य सौंदर्यीकरण कराएगी।
    प्रयागराज से चित्रकूट के बीच पहाड़ी में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा और रामायण शोध संस्थान बनाने का फैसला लिया गया है। यहां पर महर्षि  वाल्मिकी की प्रतिमा  लगेगी। स्पष्ट है कि प्रयागराज में कैबिनेट की बैठक ने आधुनिक युग के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है। कन्नौज के महाराजा हर्षवर्धन कुम्भ अवधि में अपनी सरकार यहीं से चलाते थे। तब यातायात के ऐसे साधन नहीं थे।
    योगी आदित्यनाथ ने जनभावनाओं के अनुरूप कार्य किया है। यह कैबिनेट बैठक अनेक अर्थों में महत्वपूर्ण रही। एक तो यह प्रयागराज कुम्भ में सम्पन्न हुई। दूसरा यह कि इसमें विकास और संस्कृति दोनों का ध्यान रखा गया। सड़कों के जाल बिछाने का निर्णय लिया गया, इससे विकास होगा। इन्हें प्रयागराज से जोड़ा जाएगा, यह कुम्भ पर सरकार की सौगात है।

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