- नवेद शिकोह
विश्व के तमाम देशों की तरह भारत में भी गंभीर रूप ले रहा कोरोना वायरस का मसला पिछले 24 घंटे में दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े में तब्लीगी जमात मरकज़ पर केंद्रित हो गया। अहतियात के बजाय लापरवाही करने वाली तब्लीगी जमात जब कटघरे में खड़ी हुई तो पेशेवर मीडिया और सोशल मीडिया ने इस संकट की घड़ी में भी देश को हिन्दू-मुस्लिम के रंग में बदल दिया। खालिस धार्मिक संगठन मरकज जब मीडिया ट्रायल की ज़द मे आया तो नब्बे प्रतिशत न्यूज चैनल एकतरफा बयार में बहने लगा। लगने लगा जैसे दिल्ली स्थिति निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात मरकज ने ही तमाम मुल्कों से भारत में कोरोना वायरस आयात किया है।
दिन भर टीवी चैनल्स कोरोना समस्या को निजामुद्दीन से बाहर नहीं ला पाये। कोरोना जेहाद से देश बचाव.. कोरोना से जंग में जेहाद का आघात.. जंग के नाम पर जानलेवा अधर्म.. निजामुद्दीन का विलेन कौन ! … जैसे टैगलाइन से अलग हटकर न्यूज़ 24 के वरिष्ठ पत्रकार/एंकर संदीप चौधरी ने अपने कार्यक्रम- ‘सबसे बड़ा सवाल’ में सबसे बड़ा सवाल उठाया। जो निष्पक्ष था। हर मसले को धार्मिक रंग देने के खिलाफ था। जमात के विरोध के साथ इस बात की भी याद दिला रहा था कि जब जमात ने कार्यक्रम किया था तब तक देश के अधिकांश धार्मिक स्थल बंद नहीं हुए थे। खूब धार्मिक कार्यक्रम हो रहे थे। यहां तक लॉकडाउन के बाद भी आनंद विहार में कई दिनों तक हज़ारों की भीड़ इकट्ठा होती रहीं। इस तरह की लापरवाहियां नजर आती रहीं। और अब एकाएकी निजामुद्दीन मामले को लेकर ये नैरेटिव क्रियेट किया जा रहा है कि भारत में कोरोना वायरस फैलने में सिर्फ ऐसी जमातें ही जिम्मेदार हैं।
ज्ञात हो कि दिल्ली के इस मसले पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अपने बयान में कहा कि निजामुद्दीन की जमात ने एक बड़ी साजिश के तहत इस तरह के कदम उठाये थे। इस तरह के बयानों और निजामुद्दीन पर मीडिया ट्रायल के बाद सोशल मीडिया पर भी कोरोना महामारी की इस गंभीर समस्या को धार्मिक रंग नजर आने लगे। दो खेमे तैयार हो गये। एक खेमा 22 मार्च रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा जनता कर्फ्यू के आह्वान की याद दिलाने लगा। इस दिन ही शाम पांच बजे कोरोना सेनानियों को प्रोत्साहित करने व उनका अभिनन्दन करने के लिए ताली और थाली बजाने का जो सामूहिक सराहनीय कार्यक्रम तय हुआ था उसका कुछ लोगों ने कैसे गुड़ गोबर कर दिया था। किस तरह कुछ लोग ताली और थाली बजाते बजाते अति उत्साह में भीड़ जमा करके जुलूस की शक्ल में सड़कों पर उतर आये थे। किस तरह से लॉकडाउन के दौरान कई दिनों तक दिल्ली से यूपी और बिहार के रास्तों पर पैदल चलती भूखी प्यासी मजदूरो़ की लाखों की भीड़ नजर आती रही। सरकार, प्रशासन और गैर जिम्मेदार जनता की गैर जिम्मेदाराना हरकत से क्या इस तरह की भीड़ और जुलूसों ने कोरोना वायरस को फैलाने खतरे पैदा नहीं किये होंगे।
इस तरह की बहस-मुबाहिसों के बीच संतुलित पत्रकारिता और कठोर लहजे में न्यूज 24 चैनल में जब संदीप चौधरी ने अपने शो सबसे बड़ा सवाल में एकतरफा मीडिया के रुख पर बड़े सवाल उठाये। जिसकी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में इतनी तेज़ी से वायरल हुई कि वो एनडीटीवी के रवीश कुमार की मानसिकता के मुरीद लोगों के दिलों पर छा गये। कथित भक्त जमात में कथित टुकड़े-टुकड़े गैंग वाले कहे जाने वाले रवीश घराने में अब तक करीब एक दर्जन ब्रॉड पत्रकारों का नाम शामिल है। जिसमें पुण्य प्रसून वाजपेयी, अभिसार शर्मा, अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, अभय दुबे, शेष नारायण सिंह, विनोद दुआ .. जैसे और भी तमाम पत्रकार शामिल हैं।
ये तो टीवी मीडिया की बात हुई, उधर अखबारी पत्रकारिता के दमदार और निष्पक्ष छवि के पत्रकार/संपादक दया शंकर शुक्ल ‘सागर’ का लेख भी खूब वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने हर मसले में मुसलमानों को घसीटने की आदत पर सवाल उठाये हैं।







