पूरे देश में स्मार्ट मीटर की टेक्नोलॉजी विवादों में घिरी है ऐसे में पहले स्मार्ट प्रीपेड मीटर की टेक्नोलॉजी पर बात होनी चाहिए न की सभी के घर 3 साल र्में प्रीपेड मीटर लगाने की ?
सौभाग्य योजना में हर घर को बिजली देने मात्र से सतत् नहीं मिटेगा अंधियारा जब तक गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिये बजट में नहीं किया जायेगा प्राविधान।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में उर्जा नीति को लेकर कई ऐलान किए हैं लेकिन इससे ये सिद्ध हो रहा कि ऊर्जा क्षेत्र निजीकरण की तरफ बढ़ेगा जो उपभोक्ताओं के हित में नहीं है । पूरे ऊर्जा क्षेत्र के बजट के प्राविधान से यह तय हो गया है की केंद्र सरकार बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर केंद्र सरकार आमादा है क्योंकि जिस प्रकार से कहा गया है कि बिजली उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी चुनने का अधिकार होगा, अच्छी बात है लेकिन इसमे केंद्र सरकार का हिडेन एजेंडा भी छिपा है क्योंकि मंसा साफ होती तो कहा जाता उपभोक्ताओ को सरकारी क्षेत्र में ही अनेको वितरण कंपनी चुनने का अधिकार होगा सब मिलाकर बजट से निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
कनेक्शन देने मात्र से घरों में उजाला नहीं होगा
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बजट में ऊर्जा क्षेत्र को भारी निराशा ही हाथ लगी है। अब सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि सौभाग्य योजना के तहत लगभग 2 करोड़ 47 लाख घरों को पूरे देश में बिजली दी गयी। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार को इस बजट में यह भी सोचना चाहिए था कि कनेक्शन देने मात्र से उनके घरों में उजाला नहीं होगा। गरीब परिवारों के घरों में लगातार उजाला तभी सम्भव है जब उनकी बिजली दरें कम हों। इस बजट में पूरे देश का सौभाग्य योजना के तहत जगमग परिवार इस आस में था कि उनकी बिजली दरों के लिये केन्द्र की मोदी सरकार कोई नयी योजना लाकर उन्हें सस्ती दरों पर बिजली का इन्तजाम करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उदय स्कीम लागू होने के बाद भी पूरे देश में डिस्कामों के घाटे बढ़ गये। इस योजना के बदलाव पर क्यों नहीं ध्यान दिया गया? सौभाग्य योजना के तहत पूरे देश में कुछ गिनी चुनी कम्पनियों ने घटिया सामग्री लगाकर उपभोक्ताओं को बेवकूफ बनाया उस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
किसानों को भी नहीं मिली राहत
सबसे बड़ा सवाल किसानों को राहत देने के सवाल का है तो शायद यह सभी सरकारों को पता होगा कि सही मायने में किसानों को राहत तभी होगी जब उनकी बिजली दरों में कमी के इन्तजाम हों, खाद्य सामग्री सस्ती हो, खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों में भारी छूट हो, उनके द्वारा पैदा किये गये उत्पाद का उचित मूल्य समय पर सरकारें दें, उनके बच्चों की पढ़ाई के लिये राहत भरी योजना बनायी जाये तब जाकर सही मायने में किसानों की स्थायी रूप से मदद हो पायेगी और देश का अन्नदाता आर्थिक रूप से मजबूत होगा।







