पटना/बिहार, 26 अगस्त 2025 : बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि एक महिला को कोबरा के काटने के बाद समय पर इलाज न मिलने से जान गंवानी पड़ी। यह घटना पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया ब्लॉक के एक गांव में हुई, जहां परिजनों ने अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक और तांत्रिक अनुष्ठानों पर भरोसा किया। एक वायरल वीडियो ने इस दुखद घटना को और सुर्खियों में ला दिया, जिसमें दिखाया गया कि सांप को बार-बार कटवाने की कोशिश में और जहर फैल गया। यह बॉलीवुड फिल्मों का वह मिथक है, जिसमें सांप से जहर चुसवाने की बात दिखाई जाती है, जो हकीकत में घातक है।

क्या हुआ था?
पश्चिम चंपारण के सुदूर गांव में एक 38 वर्षीय महिला (नाम गोपनीय) को खेत में काम करते समय कोबरा ने काट लिया। परिजनों ने तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाने के बजाय स्थानीय ओझा को बुलाया। सोशल मीडिया पर वायरल एक 25 सेकंड के वीडियो में दिखा कि एक व्यक्ति डंडे से सांप को पकड़कर महिला के घाव पर बार-बार दबा रहा था, यह मानते हुए कि सांप जहर चूस लेगा। लेकिन हर बार सांप ने दोबारा काटा, जिससे जहर और फैल गया। विशेषज्ञों के अनुसार, सांप का जहर चूसना असंभव है, और ऐसी कोशिशें स्थिति को और बिगाड़ देती हैं।

लगभग 7 घंटे की देरी के बाद जब महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉ. रमेश सिन्हा, जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक, के अनुसार, “कोबरा का जहर तेजी से नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। अगर 2-3 घंटे में एंटी-वेनम न दिया जाए, तो मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।”
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण भारत में अंधविश्वास और जागरूकता की कमी को उजागर किया है।वायरल वीडियो और सोशल मीडियाX पर वायरल यह वीडियो तेजी से शेयर हो रहा है, जिसमें लोग इसे “फिल्मी अंधविश्वास का नतीजा” बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह 21वीं सदी है, फिर भी लोग फिल्मों के भ्रम में जी रहे हैं। सांप जहर नहीं चूसता, यह सिर्फ सिनेमा का ढकोसला है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल सांप काटने से 46,000-58,000 मौतें होती हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं। बिहार में 2024 में 800 से ज्यादा ऐसी मौतें दर्ज की गईं।विशेषज्ञों की चेतावनीस्नेक बाइट विशेषज्ञ डॉ. अनिल शर्मा ने कहा, “सांप काटने का एकमात्र वैज्ञानिक इलाज एंटी-वेनम है, जो सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध है। झाड़-फूंक या सांप से जहर चुसवाने की कोशिश न सिर्फ समय की बर्बादी है, बल्कि जानलेवा भी है।” उन्होंने यह भी बताया कि बरसात के मौसम में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि कोबरा जैसे सांप पानी की तलाश में मानव बस्तियों के करीब आ जाते हैं।
जागरूकता की बहुत जरूरत
यह घटना बिहार में शिक्षा और जागरूकता की कमी को दर्शाती है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने कहा, “सरकार को ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। स्कूलों, पंचायतों और स्थानीय स्तर पर लोगों को यह समझाना जरूरी है कि सांप काटने का इलाज अस्पताल में है, न कि तांत्रिकों के पास।” बिहार सरकार ने 2022 में “स्नेक बाइट अवेयरनेस प्रोग्राम” शुरू किया था, लेकिन इसका प्रभाव सीमित रहा है।क्या करें, क्या न करें?
क्या करें: सांप काटने पर घाव को साफ पानी से धोएं, मरीज को स्थिर रखें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
क्या न करें: जहर चूसने की कोशिश, झाड़-फूंक, या सांप को दोबारा कटवाने जैसे खतरनाक कदम न उठाएं।
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि अंधविश्वास और अज्ञानता कितना खतरनाक हो सकता है। परिजनों ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज की है, और सामाजिक संगठनों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। यह समय है कि समाज और सरकार मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।






