मुंबई, 5 अगस्त 2025: हिंदी भक्ति संगीत के क्षेत्र में एक और मधुर रचना जुड़ने को तैयार है। तिवारी प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित भक्ति गीत गगन में छाए बदरा की शूटिंग मुंबई में सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। इस गीत में मशहूर पार्श्वगायक सुरेश वाडकर की आत्मीय आवाज है, जबकि संगीत सतीश देहरा ने तैयार किया है और गीत के बोल सुधाकर शर्मा ने लिखे हैं। यह गीत सनातन वर्ल्ड म्यूजिक के प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा, जो सनातन धर्म की शिक्षाओं और संस्कृति को संगीत के माध्यम से फैलाने के लिए जाना जाता है।
सनातन वर्ल्ड म्यूजिक: आध्यात्मिकता का संगीतमय मंच
सनातन वर्ल्ड म्यूजिक एक ऐसा मंच है जो वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों की शिक्षाओं को भक्ति संगीत के जरिए जन-जन तक पहुंचाता है। इस मंच ने अब तक हजारों भक्ति गीत और आध्यात्मिक रचनाएं रिलीज की हैं, जिनमें बॉलीवुड के कई दिग्गज गायकों की आवाजें शामिल हैं। गगन में छाए बदरा इस कड़ी में एक और महत्वपूर्ण योगदान होगा।
एस.के. तिवारी का उत्साह
इस गीत में अभिनय करने वाले एस.के. तिवारी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “हमारी पूरी टीम ने इस भक्ति गीत को बनाने में दिल और आत्मा झोंक दी है। यह गीत न केवल संगीतमय है, बल्कि यह श्रोताओं को आध्यात्मिकता की गहराई से जोड़ेगा। मुझे विश्वास है कि यह दर्शकों और श्रोताओं के दिलों को छू लेगा।” तिवारी ने इस प्रोजेक्ट को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा बताया, जिसका उद्देश्य लोगों को सनातन मूल्यों से जोड़ना है।
सुरेश वाडकर की गायकी
सुरेश वाडकर, जिन्हें हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके मधुर गायन के लिए जाना जाता है, ने इस गीत में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। उनकी गायकी में भक्ति और भावनाओं का ऐसा समन्वय है जो श्रोताओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगा। सतीश देहरा का संगीत और सुधाकर शर्मा के बोल इस गीत को और भी गहराई देते हैं, जो सावन के महीने की भक्ति और प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है।
रिलीज का है इंतजार
गगन में छाए बदरा जल्द ही सनातन वर्ल्ड म्यूजिक के यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल मंचों पर रिलीज किया जाएगा। प्रशंसकों को इस गीत का बेसब्री से इंतजार है, जो न केवल संगीत प्रेमियों, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वालों के लिए भी एक अनमोल उपहार होगा। यह गीत सनातन धर्म की भावनाओं को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करने का एक और प्रयास है, जो संस्कृति और आस्था के बीच एक सेतु बनाएगा।







