पर्यावरण प्रेमियों ने रखी अपनी बात: विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) विशेष
दहेज प्रथा को कानून बनाकर लोगों को दबाया तो जा सकता है, लेकिन उस कुप्रथा को रोकने का एक मात्र जरिया है, लोगों में जागरूकता। यही हाल है पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण का। हम लोगों को जागरूक उस पर बहुत हद तक नियंत्रण पा सकते हैं। इसके लिए सरकारों को भी खुद जागरूक होना पड़ेगा। यदि हम प्रकृति का दोहन करना न छोड़े, तो वह दिन दूर नहीं, जब वह हमारा नाश कर देगी। यह कहना है पर्यावरण प्रेमियों का। उनके अनुसार एक कोरोना वायरस के आने के बाद लाकडाउन की स्थिति में नदिया इतनी साफ हो गयी, जो करोड़ों रुपये व्यय के बाद भी नहीं हो रही थी।

हमने प्रकृति से छेड़छाड़ करने की कोशिश की:
इस संबंध में बीबीयू के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मनीष कुमार वर्मा का कहना है कि अंधे विकास की आंधी ने मानव को विनाश की राह पर लाकर खड़ा कर दिया। यह कोविड-19 भी मानव के विकास की राह में विजय की भावना का ही परिणाम है। यह वुहान के लैब से निकला वायरस हो या अन्य लेकिन इसके मूल में यही है कि हमने प्रकृति से छेड़छाड़ करने की कोशिश की। इसका यह परिणाम रहा।
अब भी नहीं सुधरे तो प्रकृति विनाश की ओर लेकर चली जाएगी
पर्यावरण पर विशेष कार्य करने वाले प्रोफेसर मनीष कुमार ने बताया कि हम विजय पाने की भावना से दूसरे जीव-जन्तुओं के साथ ही हमने अपने साथियों के साथ विजय पाने का प्रयास करने लगे। इस विकास के अंधे दौर में हमने स्व की भावना के कारण खुद को अकेला खड़ा कर दिया। हम यदि अब भी नहीं सुधरे तो प्रकृति विनाश की ओर लेकर चली जाएगी।
नदियों के स्वच्छता पर ध्यान नहीं देंगे तो प्रकृति को रूठते देर नहीं लगेगी
मिशन “मिशन कल के लिए जल” के राष्ट्रीय संयोजक चंद्रभूषण पांडेय का कहना है कि कुल वर्षा की मात्रा बढ़ाने के लिए हरित आवरण और जलावरण बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही वर्षा के जल को यथा स्थान रोकने की कोशिश की जाए। वहीं उपलब्ध जल संसाधन का मितव्ययी उपयोग किया जाए, जिसमें टपक और फव्वारा सिंचाई प्रणालियों का उपयोग शामिल हो।
उन्होंने कहा कि हमें अपने घरों के पानी के संचय की व्यवस्था भी खुद करनी होगी। यदि हम संचयन व्यवस्था नहीं करते, नदियों के स्वच्छता पर ध्यान नहीं देंगे तो प्रकृति को रूठते देर नहीं लगेगी।
घर का कूड़ा बाहर फेंकने पर सैकड़ों लोगों को प्रभावित कर देता है
प्रयागराज के ईश्वर शरण डिग्री कालेज के अध्यापक डाक्टर विकास कुमार का कहना है कि समाज सिर्फ अपना हित देखने में प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यह वैसे ही है, जैसे हम अपने घर का कूड़ा उठाकर बाहर रोड पर फेंक देते हैं। घर में रहे तो वह हमको ही संक्रमित करेगा लेकिन रोड पर जाकर वह सैकड़ों लोगों को प्रभावित कर देता है। हम सभी को खुद जागरूक होना होगा। प्रकृति की रक्षा करना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। आखिर हम प्रकृति की गोद में पले-बढ़े हैं। ऐसे में हमें सोचना होगा कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी उसका उपयोग कर सके।







