सड़क हादसा या कुछ और? बबेरू के चहेते पत्रकार बाबूलाल गुप्ता ‘नन्ना’ की मौत छोड़ गई कई गंभीर सवाल?
बबेरू (बांदा)। बड़ा हो या छोटा, अमीर हो या गरीब! बबेरू में हर जुबां पर एक नाम बेहद अदब और मोहब्बत से लिया जाता था… ‘नन्ना’। आज बबेरू की गलियां खामोश हैं, हवाओं में उदासी है और हर आंख नम है। क्योंकि सबको अपनी शालीनता से बांधकर रखने वाले बाबूलाल गुप्ता उर्फ नन्ना अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता, अडिग सिद्धांत और बेदाग शख्सियत अब सिर्फ यादों के झरोखे में सिमट कर रह गई है, जो बबेरू वासियों के दिलों में हमेशा जीवंत रहेगी।
एक साधारण निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे नन्ना का व्यक्तित्व कितना असाधारण था, इसकी गवाही उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा हजारों चाहने वालों का हुजूम दे रहा था। वह ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और उच्च मानवीय मूल्यों के साक्षात प्रतीक थे। जिसने भी उन्हें देखा, एक ही चिर-परिचित वेशभूषा में देखा। कुर्ता-पायजामा, सदरी, जेब में टंगा पेन और पैरों में चप्पल। उनकी दिनचर्या जितनी नियमित थी, उनका चरित्र भी उतना ही अडिग था। दशकों तक ‘अमर उजाला’ के क्षेत्रीय संवाददाता के रूप में काम करते हुए उन्होंने पत्रकारिता के ऊंचे मानक स्थापित किए। आज के दौर में जब पत्रकारिता और राजनीति गुटबाजी की शिकार है, नन्ना ने खुद को हर गुटबाजी से कोसों दूर रखकर अपनी एक अमिट और निष्पक्ष पहचान बनाए रखी।
काल का क्रूर प्रहार और एक अनसुलझा सवाल
बीती 25 जून 2026 की सुबह बबेरू के लिए एक ऐसा अंधेरा लेकर आई, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। रोज की तरह अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार नन्ना सुबह घर से चौराहे की तरफ अखबार लेने निकले थे। किसे पता था कि मौत वहां घात लगाए बैठी है। एक अनियंत्रित, तेज रफ्तार लोडर ने उन्हें न सिर्फ कुचला, बल्कि काफी दूर तक घसीटता हुआ ले गया।
प्रथम दृष्टया यह एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना दिखती है, लेकिन एक निर्भीक पत्रकार की इस तरह हुई मौत के पीछे एक दूसरा पहलू भी हो सकता है। कानून और प्रशासन को इस मामले की हर कोण से बारीकी से जांच करनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही, घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में मौत बनकर दौड़ने वाले ऐसे वाहनों पर नकेल कसना बेहद जरूरी है। इसके समाधान के रूप में हर वार्ड या बस्ती में आपसी सहयोग या सरकारी मदद से स्पीड सेंसर कैमरे लगाए जाने चाहिए, ताकि तेज रफ्तार गाड़ियों का भारी चालान स्वतः कट सके। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि सड़कों पर असमय टूटने वाली सांसों को भी बचाया जा सकेगा।
समाजवाद का एक मजबूत स्तंभ ढह गया
नन्ना सिर्फ एक बेहतरीन पत्रकार ही नहीं, बल्कि बांदा जिले में समाजवादी आंदोलन की बुनियाद रखने वाले पुरोधाओं में से एक थे। वह बांदा जिले में सपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रथम जिलाध्यक्ष रहे। उन्होंने अपने कड़े परिश्रम और साथियों के सहयोग से व्यापारियों को समाजवाद के झंडे तले लामबंद किया। बुंदेलखंड के तत्कालीन कद्दावर नेता और मंत्री रहे, बड़े भाई डॉ. सुरेंद्रपाल वर्मा जी के बेहद करीबियों में नन्ना भी शुमार हो गए थे। उनकी संगठन क्षमता और अटूट निष्ठा को देखकर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रद्धेय ‘नेताजी’ मुलायम सिंह यादव जी ने भी उनकी मुक्तकंठ से सराहना की थी।
नन्ना का इस तरह अचानक चले जाना, हम जैसे तमाम पुराने समाजवादी साथियों और पूरे बबेरू के लिए किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। हमारे बड़े भाई और एक सच्चे मित्र की तरह रहे नन्ना की यादें आज आंखों से आंसुओं के रूप में अनवरत बह रही हैं।
नन्ना शारीरिक रूप से भले ही विदा हो गए हों, लेकिन उनकी सादगी का कुर्ता, निष्पक्षता का पेन और समाजवाद की सदरी हमेशा बबेरू के इतिहास में अमर रहेगी। विनम्र श्रद्धांजलि!
— राम प्रताप गुप्ता (पूर्व जिलाध्यक्ष, समाजवादी संघर्ष समिति)






