आती क्या खंडाला?

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पर्यटक स्थल लोनावला और खंडाला

महाराष्ट्र का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल एवं पर्वतीय नगर खंडाला लोनावला मुंबईपुणे राजमार्ग पर स्थित है। सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के पश्चिम घाट में मोर घाट की उतराई पर खंडाला एवं लोनावला पर्वतीय स्थल महाराष्ट्र के सैलानियों में खासा प्रसिद्ध है। फिल्म ‘गुलाम’ के गीत आती क्या खंडाला, के बाद से तो इस स्थल की लोकप्रियता देशव्यापी हुई है और यहां दूर−दूर से लोग आने लगे हैं।

 

खंडाला लोनावला के मुकाबले छोटा किंतु शांत स्थल है। वर्षा ऋतु की प्रथम फुहार के बाद खंडाला का नैसर्गिक सौंदर्य अत्यंत मनोहारी हो जाता है। पर्वत श्रृंखलाओं से छोटे झरने तथा झुके हुए बादल नैसर्गिक शोभा को मनमोहक एवं नयनाभिराम बना देते हैं। यह स्थान शांत वातावरण के कारण स्वास्थ्य लाभ के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

यहां पर विश्राम गृहों, धर्मशालाओं, सेनिटोरियम आदि की भरमार है। अप्रैल माह से वर्षा आगमन तक यहां का तापमान ठीक ठाक रहता है। लोनावला की पर्वत श्रृंखलाएं पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र हैं। लवर्स प्वाइंट, टाइगर्स लीप, हार्स शू वैली, डीप प्वाइंट जैसे अनेकों दर्शनीय स्थल यहां पर हैं। साथ ही आप भुसी डेम तथा भुसी लेक भी देखने जा सकते हैं। भूसी बांध के अंत में जब जल प्रपात नदी से मिलने के लिए नदी की ओर ऊपर से नीचे गिरता है तो उसकी ध्वनि व सुंदर दृश्य सैलानी निहारते ही रह जाते हैं।

लोनावला की गुफाएं भी अद्वितीय हैं। खासकर कारला और भाजे तथा बेडसा जैसी पुरातन गुफाएं तो खासा महत्व रखती हैं। कारला गुफा अत्यंत पुरातन एवं ऐतिहासिक गुफा है। इसका निर्माण ईसा से 160 वर्ष पहले का माना जाता है। कारला गुफा में भारतवर्ष की विशालतम चैत्य गुफा का समावेश है। यहां पर बुद्धकालीन स्थापत्य कला चरम सीमा पर है। इस गुफा में खंभों पर बनाई गई अनेक कलाकृतियां स्थापत्य कला का बढ़िया उदाहरण हैं। साथ ही यहां पर काष्ठ से बना एक मंदिर भी है जिसकी आकृति कैथेड्रल से मिलती है। यहां पर भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा भी है।

भाजे गुफा लोनावला से बारह किलोमीटर दूर है। भाजे गुफा में 18 गुफाओं का समावेश है तथा 12 नंबर की गुफा सर्वश्रेष्ठ है। इसमें 13 खंभे हैं तथा 14 स्तूप हैं जो बुद्धकालीन हैं। यहां अनके विहार भी बने हुए हैं जो उपदेश एवं धार्मिक कार्यों के उपयोग में आते थे।

वेडसा गुफा सुपति पर्वत पर स्थित है। यहां पर दो गुफाएं हैं। इन गुफाओं का निर्माणकाल सम्भवतः प्रथम शताब्दी का है। गुफा के एक ओर स्त्री−पुरुष एवं पशुओं के सुंदर एवं मनमोहक भित्तिचित्र हैं। नारी अपने संपूर्ण श्रृंगार के साथ अश्व पर सवार है। भित्तिचित्र में नारी के पारदर्शक वस्त्रों की भी सुंदर रचना की गई है।

अन्य स्तंभों पर भी इसी प्रकार की चित्रकारी है। यह गुफा 30 फुट चौड़ी तथा 45 फुट गहरी है। कारला से ही तीनों गुफाओं पर जाने की व्यवस्था है। महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम द्वारा यहां पर रहने व खाने के लिए रिसोर्ट एवं होटल भी बनाये गये हैं।

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