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    ये हादसा नहीं, जर्जर स्कूल में बच्चों की सामूहिक हत्या है

    ShagunBy ShagunJuly 26, 2025Updated:July 26, 2025 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    Post Views: 1,006

    ओम माथुर

    झालावाड़ जिले के मनोहर का थाना ब्लॉक की पीपलोदी स्कूल में कमरे की छत गिरने से आठ बच्चों की मौत और कई बच्चों का घायल होना कोई हादसा नहीं, बल्कि सामूहिक हत्या है और इसका जिम्मेदार है हमारा सिस्टम। सिस्टम यानी कि प्रशासन से लेकर राजनीतिक तक सभी इसमें शामिल हैं। अगर स्कूल में भी बच्चे असुरक्षित है और इनकी जान चली जाती है, तो ऐसे सिस्टम की जरूरत क्या है? आप महाराणा प्रताप को महान बताइए और पढ़ाइए, लेकिन इस महानता को पढ़ने वाले बच्चों की जान भी तो बचाइए। पहले वर्तमान को तो सहेजो, इतिहास फिर कुरेद लेना।


    क्योंकि पढ़े लिखे लोग सवाल पूछते हैँ :-

    पत्रकार @dibang ने कहा है कि, कोई भी सरकार हो, वो आम इंसान को इंसान समझते ही नहीं हैँ, कीड़े मकोड़े समझते हैँ, वो चाहते हैँ कि लोग अनपढ़ रहे, क्योंकि पढ़े लिखे लोग सवाल पूछते हैँ, लोग अनपढ़ रहेंगे तो अपना हक़ और अपने लिए सुविधाएं नहीं मांगेगे, और राजनीतिक दल आसानी से चुनाव जीतते रहेंगे, इसीलिए स्कूल बंद किए जा रहे हैँ, स्कूल की छत गिर रही है।

    झालावाड़ की जर्जर स्कूल भवन की छत गिरना तो एक उदाहरण है। राजस्थान के हर जिले में ऐसी सैंकड़ों स्कूलें हैं, जो जर्जर हालत में है। जिनके भवन कभी भी गिर सकते हैं। लेकिन फिर भी बच्चे और शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर अध्ययन करने और अध्यापन कराने आते हैं। क्या उनके प्रति सिस्टम की कोई जिम्मेदारी नहीं है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर,पूर्व सीएम अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे आदि-आदि नेताओं की श्रद्धांजलियों के ट्वीट आ गए हैं। सभी ने जिनके बच्चे मरे, उनके परिजनों को दुख सहने की शक्ति की ईश्वर से कामना कर ली। अब मृतकों के परिजनों को कुछ लाख का मुआवजा दे दिया जाएगा। घायलों का सरकारी खर्च पर इलाज हो जाएगा। एक जांच कमेटी बना दी जाएगी। जिसकी रिपोर्ट कभी सामने नहीं आएगी। स्कूल के पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। कुछ छोटे अधिकारी और सस्पेंड कर दिए जाएंगे। बस, हो गया सिस्टम का काम खत्म। जीवन भर बिलखना तो उन अभिभावकों को है, जो अपने बच्चों के शिक्षित होकर कुछ बनने की कामना से उन्हें स्स्कूल भेज रहे थे।

    https://x.com/i/status/1948827757716373938

    हर साल स्कूलों की मरम्मत के लिए शिक्षा विभाग स्कूलों से प्रस्ताव लेता है। लेकिन उस पर अमल कितना होता है,इसकी देखरेख नहीं की जाती है। जहां मरम्मत कार्य होते भी हैं, वह कितने गुणवत्तापूर्ण है, इसकी निगरानी भी कोई नहीं करता। शहरी क्षेत्र में जिला शिक्षा अधिकारी के अधीन समसा ये काम कराता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूलों में ग्राम पंचायत के माध्यम से मरम्मत कार्य कराए जाते हैं। शायद मरम्मत के लिए आने वाला पैसा पहले जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच बंट जाता होगा। बाकी से काम शुरू होता होगा। इसमें से ठेकेदार सीमेंट- बजरी के घालमेल में गटक जाता होगा। जब बजरी ज्यादा और सीमेंट कम होगी, तो स्कूल ही बच्चों की कब्र बन जाएगी। निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा मासूम भुगतेंगे। हर साल बरसात में किसी न किसी जिले में स्कूल भवनों की दीवारें गिरने,छत गिरने या स्कूल भवन ही ध्वस्त होने की खबरें आती रहती है। लेकिन सरकारें कभी गंभीरता से इस पर चिंतन ही नहीं करती। नए स्कूल भवन अगर नहीं बनाए जाते हैं ,तो मत बनाइए। कम से कम पुराने स्कूल भवनों को तो इस लायक कर दीजिए कि देश का भविष्य सुरक्षित रहकर पढ़ सके। आखिर सरकारी स्कूलों में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार के बच्चे ही पढ़ने आते हैं। क्या उनकी जान ऐसे जोखिम में डाली जा सकती है?
    सिस्टम से जुडे लोगों यानी नेताओं,अफसरों, इंजीनियरों, ठेकेदारों के बच्चे तो निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। तो फिर, उन्हें सरकारी स्कूलों की हालत की क्या फ्रिक?

    शिक्षकों को निलंबित करना सबसे आसान था,वो सरकार ने तुरंत कर दिया। क्या सिर्फ उन्हीं का दोष था? हां,गलती जरूर थी कि जब बच्चों ने छत से कंकर गिरने की बात कही तो ध्यान देना चाहिए था। लेकिन क्यों नहीं स्कूल के प्रधानाध्यापक से लेकर संबंधित इलाके के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, ग्राम सेवा अधिकारी,उपखंड अधिकारी, जिला कलक्टर,सरकारी स्कूलों के भवन की देखरेख व मरम्मत कराने वाली एजेंसियों के अधिकारियों,अभियंताओं पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए? और अगर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर में थोड़ी सी भी नैतिकता है तो उन्हें भी इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। आखिर स्कूल शिक्षा विभाग की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। लेकिन सबको पता है,ऐसा कुछ नहीं होगा। सब बेशर्मी की चादर में मुंह डाल लेंगे। अब वह किताबी ज्ञान की बात है जब एक रेल दुर्घटना होने पर रेल मंत्री के नाते लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा दे दिया।

    Shagun

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