नई पीढ़ी को बहरा न कर दे ‘टिनीटिस’

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टिनीटिस’ की समस्या ईयर बड है जिनका इस्तेमाल युवा संगीत सुनने के लिए हर रोज लंबे समय तक करते हैं

वॉशिंगटन 19 सितम्बर। आधुनिक जीवनशैली में इयरफोन के इस्तेमाल से कान को बहरा कर देने की बीमारी तेजी से अब बढ़ती जा रही है आपने देखा होगा की आज के युवा अपने कानों में गाना सुनते या बातें करते हुए आते-जाते रहते हैं। ऐसे में कई हादसे भी होते रहते हैं लेकिन युवाओं को इसकी कोई परवाह नहीं। ऐसे में युवाओं को देखना चाहिए कि इससे हादसे ही नहीं आपके कानों की सुनने की क्षमता भी खोती जा रही है। आज के युवा ‘‘टिनीटिस’ (कान में लगातार गूंजती आवाज) की समस्या से जूझ रहे हैं। यह बहरेपन का लक्षण होता है। एक नए अनुसंधान में पता चला है कि इन लक्षणों को प्रारंभिक चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए क्योंकि इनका सामना कर रहे युवाओं को बहरेपन का गंभीर खतरा है।

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क्या है ‘‘टिनीटिस’

‘टिनीटिस’ की समस्या की वजह है ईयर बड : अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि ‘‘टिनीटिस’ की समस्या ईयर बड है जिनका इस्तेमाल युवा संगीत सुनने के लिए हर रोज लंबे समय तक करते हैं। इसके अलावा नाइटक्लब, डिस्को और रॉक कंसर्ट जैसे शोर-शराबे वाले स्थानों पर जाना भी कान की सेहत के लिए नुकसानदायक है।

किशोरों की ’टिनीटिस‘‘ की समस्या को मापा

‘‘टिनीटिस’ की परेशानी का अनुभव कर चुके किशोरों की सुनने की क्षमता का आकलन करने के लिए उन पर ‘‘सायकोअकाउस्टिक’ परीक्षण किया गया। इसमें ‘‘अकाउस्टिक चैंबर’ में ‘‘ऑडियोलॉजिस्ट’ ने ‘‘ऑडियोमीटर’ का इस्तेमाल कर सुनने की क्षमता की सीमा को मापा। इसके अलावा शोर से होने वाली परेशानी और ‘‘टिनीटिस’ की समस्या को भी मापा।

 ’टिनीटिस‘‘ उम्रदराज लोगों को होने वाली समस्या

‘टिनीटिस’ की समस्या का इतने बड़े पैमाने पर पाया जाना खतरनाक है। माना जाता था कि ‘‘टिनीटिस’ उम्रदराज लोगों को होने वाली समस्या है लेकिन हम देख रहे हैं कि अब यह बच्चों और युवाओं को भी हो रही है क्योंकि इन लोगों का शोर से ज्यादा सामना होता है। इसके अलावा कुछ और कारक भी इस समस्या के जिम्मेदार हैं।’ इसमें कान में लगातार ऐसी आवाज बजती रहती है जिसका कोई बाहरी स्रेत मौजूद नहीं होता। इससे पीड़ित लोग इसे कानों में घंटी बजने जैसी आवाज बताते हैं जबकि अन्य इसे सीटी, गूंज, फुफकार या चींचीं की सी आवाज बताते हैं।

परीक्षण में 170 किशोरों में परेशानी

सायकोअकाउस्टिक’ परीक्षण के दौरान 170 किशोरों में से 49 को यानी कुल नमूने के 28.8 फीसदी को अकाउस्टिक बूथ’ में ‘‘टिनीटिस’ की परेशानी महसूस हुई। ‘‘साउंड बूथ’ में ‘टिनीटिस’ की जो सायकोअकाउस्टिक’ लक्षण मिले, वे वयस्कों में ‘‘टिनीटिस’ की लंबे समय से चली आ रही समस्या की तरह ही हैं।

व्यस्को की तरह शिकायत नहीं करते किशोर 

किशोरों को आमतौर पर ‘‘टिनीटिस’ की समस्या होती है लेकिन वयस्कों की तरह वे इसकी ज्यादा परवाह नहीं करते हैं और इसके बारे में अपने अभिभावकों और शिक्षकों से शिकायत नहीं करते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे चिकित्सक के पास नहीं जाते और इस तरह यह समस्या लंबे समय तक चलती रहती है।

टिनीटिस’ वालो किशोर तेज आवाज को सहन नहीं कर सके

शोधकर्ताओं ने बताया है कि शोध में शामिल किशोरों में ईयर बड का लगातार इस्तेमाल और शोर-शराबे वाले माहौल में ज्यादा समय तक रहने जैसी जोखिम भरी आदतें होने के बावजूद जिन्होंने ‘‘टिनीटिस’ की समस्या का अनुभव किया, वे तेज आवाज को सहन नहीं कर सके। एजेंसी

4 COMMENTS

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