आने वाली पीढ़ियों हेतु सुरक्षित जल: एक सामूहिक जिम्मेदारी – विशेषज्ञों ने दिए जल संरक्षण के प्रभावी संदेश
लखनऊ: भूजल सप्ताह (16-22 जुलाई 2026) के तहत राज्य संग्रहालय, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट एंड फैमिली स्टडीज के संयुक्त आयोजन में 16 जुलाई को ओल्ड काउंसिल हॉल में एक बहुआयामी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में वृक्षारोपण, संग्रहालय की प्रमुख कलाकृतियों पर आधारित प्रदर्शनी तथा “आने वाली पीढ़ियों हेतु सुरक्षित जल: एक सामूहिक जिम्मेदारी” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ।
मुख्य वक्ता डॉ. ए. के. गुप्ता (अपर निदेशक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार) ने भूजल संरक्षण की चुनौतियों, सतत जल प्रबंधन के उपायों और भारत सरकार के ‘मिशन लाइफ’ अभियान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में आम जन की भागीदारी पर जोर दिया।राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने भारतीय परंपरा में जल संरक्षण की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए प्राचीन बावड़ियों, कुओं, तालाबों और वर्षा जल संचयन प्रणालियों के उदाहरण दिए। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर बल दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजकुमार मित्तल, कुलपति, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय ने कहा कि जल संरक्षण हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने विवेकपूर्ण जल उपयोग और भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण की अपील की।कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. यू. वी. किरण ने किया। समापन पर मुख्य अतिथि और वक्ताओं को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोनिका शर्मा ने किया, जबकि सुश्री अल शाज फात्मी ने आभार व्यक्त किया।यह कार्यक्रम जल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने और सांस्कृतिक विरासत को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का बेहतरीन उदाहरण साबित हुआ।







