शिक्षा का गतिमान सन्देश

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कुलाधिपति के रूप में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल विद्यर्थियो को सामाजिक दायित्व का सन्देश देती है। दीक्षान्त समारोह के समारोहों को उन्होंने औपचारिकता से निकाल के सामाजिक जागरण का नया रूप प्रदान किया है। ऐसे प्रत्येक समारोहों में वह उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों से दहेज न लेने व न देने का आह्वान करती है। इसी के साथ वह स्वच्छता, स्वास्थ के प्रति जागरूकता का भी सन्देश देती है।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के तेइसवें दीक्षान्त में भी उन्होंने सामाजिक दायित्व के इस अभियान को आगे बढ़ाया। उन्होंने विश्वविद्यालय की पत्रिका गतिमान का लोकार्पण किया।

जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पुर्वांचल विश्विद्यालय के तेईसवे दीक्षांत समारोह में पैसठ मेधावियों गोल्ड मेडल व एक सौ इक्कीस शोधार्थियो को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। आनंदीबेन ने बालिकाओं की सफलता को प्रशंसनीय बताया। कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं है। प्रदेश सरकार ने कन्या सुमंगला योजना शुरू की है। इससे भी बालिकाओं को शिक्षा में सहायता मिलेगी।

दीक्षान्त समारोहों से पहले छोटे बच्चों को दूर रखा जाता था। लेकिन आनन्दी बेन ने दीक्षान्त में बच्चों को बुलाने की परंपरा शुरू की थी। उनका कहना था कि इससे छोटे बच्चों को भी आगे पढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दीक्षात में भी आनन्दी बेन ने अपनी परम्परा का निर्वाह किया। राजकीय स्कूलों के अनेक बच्चों को उन्होंने स्कूल बैग, स्वेटर व किताबे वितरित की।

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