मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति, इसके साथ भेदभाव सृष्टि के साथ अन्याय: मुख्यमंत्री

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  • राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित किया
  • सर्वाेच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को 39 स्वर्ण, 32 रजत, 32 कांस्य कुल 103 पदक प्रदान किये गये
लखनऊ: 19 मई, 2018: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने दीक्षान्त समारोह को जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यहां किताबी पढ़ाई समाप्त और जीवन की लड़ाई प्रारम्भ होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम की सलाह देते हुए जीवन में सफलता प्राप्त करने के 4 मंत्र, व्यक्तित्व विकास पर कार्य करना, अच्छे काम की तारीफ करना, किसी की अवमानना न करना तथा किसी भी कार्य को अच्छे से अच्छा करने के निरन्तर विचार करते रहना, बताये। उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की बढ़ती संख्या को महिला सशक्तीकरण का प्रभाव बताते हुए उन्होंने इसे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा शुरू किये गये ‘सर्वशिक्षा अभियान’ तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का परिणाम बताया।
राज्यपाल आज यहां डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में आयोजित चतुर्थ दीक्षान्त समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वे विश्वविद्यालय के चार दीक्षान्त समारोह में सम्मिलित हुए हैं। विश्वविद्यालय ने इस अवधि में प्रशंसनीय प्रगति की है। दीक्षान्त समारोह में कुल 829 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गयीं। इनमें से सर्वाेच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को राज्यपाल श्री राम नाईक जी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा 39 स्वर्ण, 32 रजत, 32 कांस्य कुल 103 पदक प्रदान किये गये।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। इसके साथ भेदभाव सृष्टि के साथ अन्याय है। अपनी मेधा, प्रतिभा, लगन, परिश्रम से विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाली दिव्यांग विभूतियों ऋषि अष्टावक्र, सन्त सूरदास, वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग, एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा, आईएएस अधिकारी सुहास एलवाई आदि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिभा हर मनुष्य में होती है। यह किसी व्यक्ति, जाति की मोहताज नहीं है। प्रतिभा को मंच की आवश्यकता होती है। डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय यही मंच देने का कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन एक कला है। धैर्य के साथ अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को समुचित ढंग से प्रयोग करने वाले के लिए कुछ भी कठिन नहीं है। जीवन में कुछ विशिष्ट करने के लिए सकारात्मक नजरिये की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि केन्द्र और प्रदेश सरकार दिव्यांगजन के कल्याण के लिए सतत कार्यरत है। इस उद्देश्य से अनेक कदम उठाये गये हैं। प्रधानमंत्री जी स्वयं इन कार्याें की माॅनीटरिंग करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डाॅ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में अध्ययनरत दिव्यांगजन के कल्याण, प्रोत्साहन और स्वावलम्बन के लिए हर सम्भव प्रयास करेगी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात सामाजिक कार्यकत्री पद्मश्री डाॅ. उमा तुली ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा ऐसा यंत्र है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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