राज्यपाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का व्यक्तित्व चुम्बकीय था। उनकी सज्जनता, सादगी एवं मित्रवत व्यवहार ऐसा था जो सबको अपनी ओर आकर्षित करता था। सबको साथ लेकर चलने की उनमें अद्भुत शक्ति थी। जिन लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को देखा व सुना है, उनकी वाणी व विचार से उन्हें आज भी प्रेरणा मिलती है। लेकिन जिन लोगों ने उन्हें नहीं देखा है वे भी उनके विचार के आधार पर काम करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल ने अपने विचारों के माध्यम से लोगों में विश्वास पैदा किया।
श्री नाईक ने कहा कि पंडित दीनदयाल की यह 50वीं पुण्यतिथि है लेकिन उनके विचारों को लेकर हम आज भी सामाजिक, राजनैतिक व अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी विवेकानन्द, डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तरह पंडित दीनदयाल का निधन भी कम आयु में हुआ। कम आयु में भी उन्होंने जो विचार रखे उसका अमरत्व आज भी अमीर, गरीब एवं पीड़ित, सभी को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। पंडित दीनदयाल की सहजता और आत्मीयता में कर्तव्यबोध कराने की शक्ति थी। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल की एकात्म मानववाद की परिकल्पना प्रभावित करने वाली विचारधारा हैं।
राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल ने साम्यवादी और पूंजीवादी विचारधारा के बीच मानवतावादी सोच को आगे बढ़ाया। उन्होंने अंत्योदय की कल्पना समाज के सामने रखी। उनका मानना था कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास होना चाहिए। पंडित जी ने वैचारिक एवं व्यवहारिक ढंग से समाज का जो मार्गदर्शन किया वह अद्भुत है। राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन भी पंडित दीनदयाल के विचारों से प्रभावित रहा है। पंडित जी की प्रेरणा ही से उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय लिया। समाज में दबे-कुचले एवं वंचितों को न्याय दिलाना ही एकात्म मानववाद और अंत्योदय है यही पंडित जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल की वैचारिक भूमिका को समझने की आवश्यकता है।






