लखनऊ, 16 सितम्बर 2018: राजनीति और लोकतंत्र एक दूसरे पर आश्रित है। संविधान के दायरे में रहकर इनको मर्यादित किया जाता है। प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकार के साथ साथ कर्तव्यों का भी ज्ञान होना चाहिए। देश को सर्वोच्च मानना होगा। अपने विरोध की अभिव्यक्ति भी शांतिपूर्ण होना चाहिए। अराजकता या तोड़फोड़ प्रजातन्त्र को कमजोर करते है। यह बात राजनीति की पाठशाला संगोष्ठी में वक्ताओं ने कही।
उन्होंने कहा कि संविधान में मूल कर्तव्यों को स्थान दिया गया। इसके साथ ही हमको भारतीय संस्कृति के अनुरूप नैतिक, मर्यादित और समरसतापूर्ण जीवन शैली अपनानी चाहिए।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ मनीष श्रीवास्तव थे। इस अवसर पर डॉ दिलीप अग्निहोत्री, बलदाऊ श्रीवास्तव, अजय पांडेय, डॉ मंजुला उपाध्याय, राजेश श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किये।







