स्लो कनेक्टिविटी का मुद्दा उठने पर पॉवर कार्पोरेशन में मचा हड़कम्प!

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  • मुद्दा उठते ही जारी किये गये अनेकों निर्देश, मानीटरिंग के एक-एक अधिकारी को दिया गया जिम्मा
  • एचसीएल का हेल्प डेस्क व टोल फ्री नम्बर भी हुआ जारी

लखनऊ, 31 अक्टूबर 2018: पूरे प्रदेश में सभी चारों बिजली कम्पनियों में एचसीएल बिलिंग सिस्टम की स्लो कनेक्टिीविटी, सर्वर डाउन, फीडिंग न होना, पीडी का निस्तारण न होना, अन्य उपभोक्ता समस्याओं की अपडेटिंग में घण्टों इन्तजार करने के मामले में उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा ऊर्जा मंत्री के समक्ष पूरा मुद्दा उठाये जाने के मात्र 24 घण्टे बाद ही पावर कार्पोरेशन प्रबन्ध हरकत में आ गया और उच्च प्रबन्धन ने सभी सम्बन्धित जिम्मेदार अधिकारियों को तलब कर पूरे मामले पर मीटिंग के बाद सभी बिजली कम्पनियों के लिये अलग-अलग दो प्रभावी आदेश जारी किया है।

ऊर्जा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन के निर्देश पर निदेशक वाणिज्य द्वारा बिजली कम्पनियों के लिये जारी अलग-अलग अपने आदेश में एचसीएल सिस्टम की पूरी तरह स्लो कनेक्टिविटी को समाप्त कर उच्च गुणवत्ता की सेवा देने का निर्देश दिया गए है। कार्पोरेशन द्वारा एचसीएल का एक हेल्प डेस्क, टोल फ्री नम्बर जारी करते हुए सभी 29 क्षेत्रीय मुख्य अभियन्ताओं के क्षेत्रों की अलग-अलग मानीटरिंग करने के लिये एक-एक अभियन्ता की जिम्मेदारी भी तय की है, जो सतत् पूरे मामले पर नजर रखेंगे। किसी भी क्षेत्र में स्लो कनेक्टिविटी पर उस क्षेत्र के अभियन्ता को अविलम्ब हेल्प डेस्क और टोल फ्री नम्बर पर सूचना देनी होगी, जिससे सतत् मानीटरिंग कर जिम्मेदार अभियन्ता समस्या का समाधान करा सकें। एचसीएल को स्लो कनेक्टिविटी अविलम्ब दूर करने के निर्देश दिये गये है, अन्यथा की स्थिति में एचसीएल कम्पनी के खिलाफ हो सकती है कार्यवाही। उपभोक्ता परिषद ने कार्पोरेशन के आईटी विंग के कार्य कलापों की पूरी समीक्षा की भी मांग उठायी।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने मा0 ऊर्जा मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद जो तत्परता दिखायी। यदि यही तत्परता पहले दिखायी होती तो उपभोक्ता परिषद को पूरा मामला ऊर्जा मंत्री के सामने न रखना पड़ता। पिछले कई महीनों से जिस प्रकार से प्रदेश के उपभोक्ताओं को स्लो कनेक्टिविटी से बड़ी कठिनाई उठानी पड़ी, उससे कार्पोरेशन को आगे सबक लेना चाहिए।

कार्पोरेशन को इस बात की उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए कि एचसीएल कम्पनी को जब से बिलिंग का जिम्मा दिया गया तब से लगातार कोई न कोई व्यवधान लगा रहता है, जबकि इस कार्य के लिये एचसीएल को लगभग 650-700 करोड़ का ठेका दिया गया था और अब कार्य की अवधि भी पूरी हो रही है। ऐसे में इतना खर्च होने के बाद भी कई वर्षों से उपभोक्ता परेशानी उठा रहे हैं, इसके लिये जिम्मेदार कौन है।

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