आयोग ने ट्रांसमिशन टैरिफ 19 पैसे से घटाकर साढ़े अट्ठारह पैसा प्रति यूनिट किया

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अनुमोदित जबकि ट्रांसमिशन कम्पनी ने प्रस्तावित किया था 24 पैसा प्रति यूनिट

ट्रांसमिशन कम्पनी की विद्युत दर में कमी के बाद अब आम जनता की दरों में कमी का आयोग पर बढ़ा दबाव
उपभोक्ता परिषद ने सरकार से लगायी गुहार कहा: पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली दरों में बढ़ोत्तरी कराये जाने की साजिश पर सरकार लगाये फटकार और जनता को दिलाये राहत

लखनऊ,28 अगस्त 2019: उप्र पावर ट्रांसमिशन निगम लि द्वारा विद्युत नियामक आयोग मे दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता वर्ष 2019-20 व टूअप 2016-17 पर विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री आरपी सिंह व सदस्य श्री केके शर्मा द्वारा अपना फैसला आज सुना दिया गया।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की लड़़ाई रंग लायी:

आयोग ने पावर ट्रांसमिशन पावर लि की अनेकों दलीलों को खारिज करते हुये उपभोक्ता परिषद की बातों पर गम्भीरता से विचार किया और फैसला सुनाते हुये पावर ट्रांसमिशन कम्पनी वर्ष 2019-20 के लिये दाखिल कुल राजस्व आवश्यकता रू0 2890 करोड़ में भारी कटौती करते हुये केवल रू0 2051 करोड़़ अनुमोदित किया यानी कि रू0 839 करोड़ को नकार दिया, जो उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि आयोग द्वारा उसी क्रम में ट्रांसमिशन की बिजली दर 24 पैसे प्रति यूनिट जो ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा प्रस्तावित थी उसमें कटौती करते हुये केवल 0।1848 पैसे प्रति यूनिट(साढ़े अट्ठारह पैसे) ही अनुमोदित किया, जो प्रदेश के उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है। सबसे बड़ा फैसला तो यह है कि वर्तमान में ट्रांसमिशन कम्पनी की दर 19 पैसा प्रति यूनिट है ऐसे में उससे भी कम टैरिफ तय करने से अब आयोग के ऊपर बिजली दरों में ब्यापक घटोत्तरी का दबाव बढ़ गया है। वहीं ट्रांसमिशन हानियों को आयोग ने जो प्रस्तावित 3।56 प्रतिशत था, उसे ही मान लिया।


विरोधी यह न समझे कि मैं कमजोर हो गया हूं: अवधेश वर्मा

बता दें कि उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा का पिछले सप्ताह एक्सीडेंड हो गया था। जिसमें उनके बाएं पैर में काफी गंभीर चोट आयी थी। ऑप्रेशन के एक सप्ताह बाद वह फिर अपने मुखर अंदाज में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने एक बातचीत में कहा कि चोट मेरे पैर में लगी है लेकिन मेरा दिमाग और हाथ सही काम कर रहे है विरोधी यह न समझे कि मैं कमजोर हो गया हूं!


उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद की लड़ाई रंग लायी और अन्ततः आयोग को ट्रांसमिशन टैरिफ की दरों में कमी करना पड़ा। पूरे टैरिफ आदेश में उपभोक्ता परिषद की दलीलों पर ट्रांसमिशन कम्पनी कोई भी सार्थक जवाब नहीं दे पायी है, जिसके चलते नियामक आयोग द्वारा बड़े पैमाने पर उसके एआरआर में कटौती कर दी गयी है। कर्मचारियों पर कुल खर्च ट्रांसमिशन कम्पनी ने 1022 करोड़ मांगा था लेकिन उपभोक्ता परिषद की लामबंदी काम आयी और उसमें भारी कटौती करते हुये उसमे 744 करोड़ आयोग ने अनुमोदित किया। इसी प्रकार कुल ओ0एण्डम खर्च जो ट्रांसमिशन कम्पनी ने 1516 करोड़ माना था वह मात्र 1103 करोड़ अनुमोदित हुआ है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि अब आयोग के ऊपर बिजली दरों में कमी करने का पूरा आधार तय हो गया है। एक तरफ उत्पादन लागत में कमी हुई अब दूसरी तरफ ट्रांसमिशन टैरिफ में कमी हो गयी। ऐसे में अब आयोग को पावर कारपोरेशन के दबाव में न आकर बिजली दरों में भारी कमी करके आम जनता के बीच में अपनी विश्वसनीयता और पारदर्शिता स्थापित करनी चाहिये।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा अब उप्र सरकार को भी आगे आकर पावर कारपोरेशन के अनुचित दबाव पर फटकार लगाते हुये जनता को लाभ दिलाना चाहिये।

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