Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, June 25
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    आखिर क्यों आधुनिक तकनीक के बावजूद नए बने पुल बार-बार ढह रहे हैं?

    ShagunBy ShagunJuly 15, 2025Updated:July 15, 2025 Current Issues No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 833

    सुशील कुमार

    भारत में बुनियादी ढांचे का विकास भले ही तेजी से हो रहा हो, लेकिन हाल के वर्षों में बार-बार होने वाली पुल ढहने की घटनाएं इस प्रगति पर गंभीर सवाल उठाती हैं। ये हादसे न केवल जान-माल का नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव की कमी और जवाबदेही में खामियों को भी उजागर करते हैं। बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हाल की घटनाएं, जैसे 2025 में पुणे और वडोदरा के हादसे, इस समस्या की गंभीरता को और स्पष्ट करती हैं। दूसरी ओर, ऐतिहासिक पुल जैसे असम का नाम डांग ब्रिज (1703), जौनपुर का शाही पुल (1568-69), और इलाहाबाद का नैनी ब्रिज (1865) सदियों से प्राकृतिक आपदाओं को झेलते हुए आज भी मजबूती से खड़े हैं। आखिर क्यों आधुनिक तकनीक के बावजूद नए बने पुल बार-बार ढह रहे हैं? आइए, इसके कारणों और समाधानों का विश्लेषण करें।

    पुल हादसों के प्रमुख कारण –

    निर्माण में खराब गुणवत्ता और भ्रष्टाचार

    हाल के वर्षों में कई पुलों के ढहने की वजह घटिया सामग्री और निर्माण में लापरवाही रही है। उदाहरण के लिए, बिहार में 2024 में सुपौल के कोसी नदी पर बन रहे 1200 करोड़ रुपये की लागत वाले पुल का हिस्सा ढह गया, जिसमें एक मजदूर की मौत हुई। इसी तरह, गुजरात के वडोदरा में गंभीरा-मुजपुर पुल (1985 में निर्मित) के ढहने से 16 लोगों की जान चली गई। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का आरोप है कि इन परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के कारण सामग्री की गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग और मानकों की अनदेखी आम बात हो गई है।

    रखरखाव की कमी

    कई हादसों में पुराने और जर्जर पुलों की समय पर मरम्मत न होना प्रमुख कारण रहा है। वडोदरा के गंभीरा पुल की मरम्मत की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनदेखी की।, नवादा में 1968 में बना कौड़िहारी नहर का पुल भी मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। नियमित निरीक्षण और रखरखाव की कमी के कारण पुल कमजोर हो जाते हैं और छोटी सी प्राकृतिक आपदा या ओवरलोडिंग में ढह जाते हैं।

    https://x.com/i/status/1945030750257999884

    प्राकृतिक आपदाएं और ओवरलोडिंग

    एक अध्ययन के अनुसार, भारत में 80.3% पुल प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़, भूकंप) के कारण ढहते हैं, जबकि 10.1% मामलों में सामग्री की खराबी और 3.28% में ओवरलोडिंग जिम्मेदार होती है। बिहार के सहरसा में 2025 में एक 20-25 साल पुराना पुल ओवरलोड ट्रैक्टर के कारण ढह गया। इन मामलों में डिजाइन में खामियां, जैसे अपर्याप्त लोड-बेयरिंग क्षमता, भी हादसों को बढ़ावा देती हैं।

    निगरानी और जवाबदेही का अभाव

    पुलों की निगरानी और नियमित जांच के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (IBMS) के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1,72,517 पुल और पुलिया हैं, जिनमें से 30% पुलिया, 12-15% छोटे पुल, और 8-10% बड़े पुल खराब स्थिति में हैं। फिर भी, ज्यादातर मामलों में हादसों के बाद जांच तो शुरू होती है, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई शायद ही होती है। उदाहरण के लिए, वडोदरा हादसे में चार अधिकारियों को निलंबित किया गया, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

    तकनीकी और डिजाइन संबंधी खामियां

    आधुनिक तकनीक के बावजूद, कई बार डिजाइन में त्रुटियां या स्थानीय परिस्थितियों (जैसे मिट्टी की स्थिति, नदी की गहराई) को नजरअंदाज करना हादसों का कारण बनता है। वडोदरा के गंभीरा पुल के 23 स्पैन और 900 मीटर लंबाई के बावजूद, इसकी संरचनात्मक मजबूती पर सवाल उठे। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे स्पैन वाले पुलों में पिलरों की दूरी और सामग्री की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

    ऐतिहासिक पुलों की तुलना:

    क्या सीख सकते हैं?

    असम का नाम डांग ब्रिज, जो 1703 में एक ही पत्थर से बना और चावल, काली दाल, और नींबू जैसी सामग्री से मजबूत किया गया, आज भी मजबूती से खड़ा है। इसी तरह, जौनपुर का शाही पुल और इलाहाबाद का नैनी ब्रिज, जो क्रमशः 16वीं और 19वीं सदी में बने, आज भी उपयोग में हैं।

    इनकी लंबी उम्र का राज है:

    1. गुणवत्तापूर्ण सामग्री: उस समय भ्रष्टाचार कम था, और निर्माण में मजबूती पर ध्यान दिया जाता था।
    2. पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन: ये पुल स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जैसे भूकंप और बाढ़ प्रतिरोधी संरचनाएं।
    3. नियमित रखरखाव: अंग्रेजों और मुगलों के समय में रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता था, जो आज की व्यवस्था में कमी है।
    4. हाल की घटनाएं: पुणे और वडोदरापुणे (2025): इंद्रायणी नदी पर बना लोहे का पुल ढहने से चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। लगभग 38 लोगों को बचाया गया, लेकिन कुछ के दबे होने की आशंका थी। मुख्यमंत्री ने आर्थिक सहायता की घोषणा की, लेकिन निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल बने रहे।
    5. वडोदरा (2025): गंभीरा-मुजपुर पुल के ढहने से 16 लोगों की मौत हुई। यह 43 साल पुराना पुल जर्जर था, और मरम्मत की मांग को नजरअंदाज किया गया।, स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन साल पहले ही इसकी खराब हालत की शिकायत की गई थी।
    6. समाधान के उपायनिर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण: ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए सख्त दिशानिर्देश और तीसरे पक्ष की ऑडिट प्रणाली लागू की जानी चाहिए।
    7. नियमित रखरखाव और निरीक्षण: बिहार में हाल ही में शुरू की गई ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी, जिसमें 200 जर्जर पुलों की मरम्मत की जाएगी, एक अच्छा कदम है। इसे पूरे देश में लागू करना होगा।
    8. जवाबदेही सुनिश्चित करना: हादसों के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच जरूरी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि गलती करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन इसे अमल में लाना होगा।
    9. आधुनिक तकनीक का उपयोग: एआई और ड्रोन जैसी तकनीकों से पुलों की स्थिति की निगरानी की जा सकती है, जैसा कि बिहार में कुछ पुलों के लिए शुरू किया गया है।
    10. जागरूकता और प्रशिक्षण: इंजीनियरों और ठेकेदारों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन और निर्माण के लिए प्रशिक्षित करना होगा।

    पुल हादसों का सिलसिला भारत के बुनियादी ढांचे की प्रगति पर एक काला धब्बा है। ऐतिहासिक पुलों की मजबूती हमें यह सिखाती है कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण और नियमित रखरखाव से लंबे समय तक टिकने वाली संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। लेकिन आज भ्रष्टाचार, लापरवाही और निगरानी की कमी ने आधुनिक पुलों को कुरकुरे की तरह नाजुक बना दिया है। सरकार, ठेकेदारों और अधिकारियों को मिलकर इस खोखली व्यवस्था को सुधारना होगा, ताकि भविष्य में जान-माल का नुकसान रोका जा सके।

    Shagun

    Keep Reading

    A World Drifting Towards Loneliness: Questions About the Institution of Family

    अकेलेपन की ओर बढ़ती दुनिया: परिवार की संस्था पर सवाल

    मुंबई में तोड़फोड़ की राजनीति: शिवसेना का दूसरा टूटना

    Shared heritage gave the country 'Amrit' (nectar), while extremism is spreading 'poison'!

    साझी विरासत ने देश को दिया ‘अमृत’ तो कट्टरपंथ दे रहा ‘ज़हर!’

    Idli. For just one rupee—not a bad deal!

    इडली. सिर्फ एक रुपए में, सौदा बुरा नहीं !

    पीओके में भीतरी बगावत बनी पाकिस्तान के लिए सबसे गंभीर चुनौती

    Trump's Stern Message to Iran: 'A Very Good Deal' or 'The Other Path'

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Defeating cyber adversaries with the power of AI! Kratical Tech's blockbuster IPO on June 30.

    एआई की ताकत से साइबर दुश्मनों को मात! क्राटिकल टेक का 30 जून को धांसू IPO

    June 24, 2026
    Monsoon arrives! Weather in UP to change in 3-4 days; major relief from heat and humidity expected.

    मानसून की दस्तक! UP में 3-4 दिनों में बदलेगा मौसम, गर्मी-उमस से मिलेगी बड़ी राहत

    June 24, 2026
    A World Drifting Towards Loneliness: Questions About the Institution of Family

    अकेलेपन की ओर बढ़ती दुनिया: परिवार की संस्था पर सवाल

    June 24, 2026
    Shocking revelation of bonded labor in Muzaffarnagar: 12 workers rescued from the jaws of death; 2 arrested.

    मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी का सनसनीखेज खुलासा: 12 श्रमिकों को मौत के मुंह से बचाया, 2 गिरफ्तार

    June 24, 2026

    AI के विस्तार को लेकर CTO का विश्वास लगातार तीसरे साल कमजोर पड़ा: अक्कोडिस रिपोर्ट

    June 23, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading