बिहार चुनाव: मैथिली ठाकुर को BJP टिकट पर स्थानीय कार्यकर्ताओं का उग्र विरोध
पटना/दरभंगा, 21 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भाजपा के अंदर हंगामा मच गया है। प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर को अलीनगर विधानसभा सीट से टिकट दिए जाने के बाद पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं ने खुला विरोध शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सालों तक पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया, लेकिन टिकट “बाहरी” और “नचनिया-गवैया” को दे दिया गया। एक वायरल वीडियो में भाजपा समर्थक चिल्लाते दिख रहे हैं: “दरी बिछाए हम लोग, कुर्सी लगाए हम लोग, बूथ कमेटी बनाए हम लोग, पन्ना प्रमुख बनाए हम लोग, कार्यकर्ता के सुख-दुख में जाएं हम लोग… और टिकट देंगे नचनिया गवैया को!”
यह विरोध 16 अक्टूबर को टिकट घोषणा के तुरंत बाद तेज हो गया। अलीनगर के सातों मंडल अध्यक्षों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मैथिली ठाकुर का इलाके से कोई जुड़ाव नहीं है और वे स्थानीय नेता संजय सिंह का समर्थन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टिकट नहीं काटा गया तो वे पार्टी से इस्तीफा दे देंगे और पंचायत स्तर के अभियान से हट जाएंगे।

एक कार्यकर्ता ने कहा, “हमने संगठन मजबूत किया, लेकिन दिल्ली से पैराशूट पर उतरकर आई सेलिब्रिटी को प्राथमिकता दी गई।”
पप्पू यादव का पुराना विरोध फिर उभरा : इससे पहले भी मैथिली ठाकुर के टिकट की अटकलों पर विवाद हुआ था। पूर्व विधायक और जमीनी नेता पप्पू यादव (जिन्हें स्थानीय स्तर पर “पप्पू भैया” कहा जाता है) को टिकट न मिलने पर अलीनगर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए थे: “पप्पू भैया अलीनगर के साथ हैं!” यादव के समर्थक आज भी मैथिली के खिलाफ सक्रिय हैं और कह रहे हैं कि एक गायिका जो बिहार की जमीनी समस्याओं से अनजान है, वह कैसे विधायक बनेगी।
https://x.com/i/status/1979907499378508129
मैथिली ठाकुर ने 16 अक्टूबर को अपना नामांकन दाखिल किया और ट्विटर पर लिखा: “आप सभी से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर मेरे जनसेवा के संकल्प को मजबूत करें।” लेकिन उनकी पहली रैली में कुर्सियां खाली रहीं और कार्यकर्ताओं का बहिष्कार देखने को मिला।
https://shagunnewsindia.com/maithili-thakurs-ticket-popularity-or-political-gamble/
भाजपा पर सवाल: सेलिब्रिटी vs जमीनी कार्यकर्ता?यह मामला भाजपा की “पैराशूट कैंडिडेट” नीति पर सवाल खड़े कर रहा है। मैथिली, जो जबलपुर में रहती हैं और बिहार से 30 साल पहले उनका परिवार पलायन कर गया था, को युवा वोटरों और सोशल मीडिया प्रभाव को आकर्षित करने के लिए चुना गया। उनके पिता रमेश ठाकुर ने कहा था कि लालू यादव के समय जातिगत हिंसा के कारण वे बिहार छोड़कर आए थे।
लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता इसे “मोदी-शाह की थोपाई” बता रहे हैं।
विपक्ष, खासकर कांग्रेस और RJD, इसे भाजपा की आंतरिक कलह का मौका मान रहे हैं। एक कांग्रेस नेता ने कहा, “भाजपा महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन जमीनी महिलाओं को नजरअंदाज कर रही है।”
अब सवाल यह है कि क्या भाजपा टिकट वापस लेगी या विरोध दबाने की कोशिश करेगी? चुनावी माहौल में यह विवाद एनडीए की एकजुटता को चुनौती दे रहा है।







