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    रूस और चीन के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग एशिया की ऊर्जा वृद्धि के साथ वैश्विक बाजारों को दे रहा नया आकार

    ShagunBy ShagunSeptember 9, 2026 NewsVoir No Comments6 Mins Read
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    व्लादिवोस्तोक, रूस

    एशिया की बढ़ती औद्योगिक क्षमता, ऊर्जा मांग और बुनियादी ढांचे में निवेश वैश्विक ऊर्जा बाजारों को नया आकार दे रहे हैं। चीन वैश्विक ऊर्जा खपत और उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, जबकि रूस एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता और प्रौद्योगिकी साझेदार बना हुआ है। यह बात रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इगोर सेचिन ने व्लादिवोस्तोक में आयोजित VIII रूसी-चीनी ऊर्जा व्यापार मंच में अपने संबोधन के दौरान कही।

    रूस-चीन सहयोग से एशिया के ऊर्जा बाजार को नई दिशा

    सेचिन ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में हो रहे बदलावों को रेखांकित करते हुए एशिया की बढ़ती भूमिका, रूस-चीन ऊर्जा सहयोग तथा भू-राजनीतिक तनाव, स्थापित व्यापार नियमों में व्यवधान और तेज तकनीकी बदलावों के बीच ऊर्जा बाजारों के सामने उभर रहे नए जोखिमों पर प्रकाश डाला।

    एशिया का बढ़ता ऊर्जा महत्व

    2026 के पहले सात महीनों में रूस और चीन के बीच व्यापार कारोबार पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 26% बढ़ा। चीन को रूस के निर्यात में रूसी ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी 60% से अधिक है, जबकि रूस चीन का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और उसकी हिस्सेदारी 22% है।

    रूस लगातार चार वर्षों से चीन का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है, जिसकी वार्षिक आपूर्ति 100 मिलियन टन से अधिक है। 2026 के पहले सात महीनों में आपूर्ति 67 मिलियन टन तक पहुंच गई, जबकि चीन के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 23% हो गई।

    सेचिन द्वारा प्रस्तुत एक अनुमान के अनुसार, मध्य पूर्व के वैकल्पिक स्रोतों की तुलना में रूसी तेल की अधिक कुशल खरीद से चीन को 2022 से अब तक 27 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ हुआ है।

    रूस चीन का सबसे बड़ा गैस आपूर्तिकर्ता भी है। 2025 के अंत तक चीन के प्राकृतिक गैस आयात में रूसी गैस की हिस्सेदारी लगभग 30% थी, जिसमें पाइपलाइन गैस आयात का 47% और LNG आयात का 14% शामिल है।

    चीन का औद्योगिक पैमाना बढ़ा रहा है ऊर्जा की मांग

    सेचिन ने कहा कि वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 30% है, जो अमेरिका और यूरोपीय संघ की संयुक्त हिस्सेदारी से लगभग दोगुनी है। वैश्विक इस्पात उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 54%, दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के प्रसंस्करण में 85–90% और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों की विनिर्माण क्षमता में 70% से अधिक है।

    पिछले वर्ष चीन की बिजली खपत 10 ट्रिलियन kWh से अधिक रही, जबकि उसकी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 4,000 GW से अधिक हो गई। अकेले एक वर्ष में 500 GW से अधिक क्षमता जोड़ी गई।

    पारंपरिक ऊर्जा का महत्व भी बना हुआ है। चीन ने पिछले वर्ष 78 GW की कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता शुरू की, जबकि नई परियोजनाओं की क्षमता 160 GW से अधिक है। सेचिन द्वारा उद्धृत पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दशक में चीन की बिजली खपत में कोयले की हिस्सेदारी लगभग 40% रहेगी। रूस चीन के कोयला आयात का लगभग 20% आपूर्ति करता है और पिछले वर्ष लगभग 90 मिलियन टन कोयला चीन पहुंचाया।

    परमाणु ऊर्जा और विद्युतीकरण

    चीन दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा विकास कार्यक्रम को लागू कर रहा है। देश में 64 परमाणु रिएक्टर परिचालन में हैं और अन्य 37 निर्माणाधीन हैं।

    रूस-चीन सहयोग में रूस की भागीदारी से निर्मित तियानवान परमाणु ऊर्जा संयंत्र की चार बिजली इकाइयां शामिल हैं। इसके अलावा, तियानवान और शुडापु परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में नई इकाइयां रूसी रिएक्टरों से सुसज्जित की जा रही हैं। प्रत्येक संयंत्र में 1,200 MW क्षमता वाली दो इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।

    रूस ने चीन के CFR-600 फास्ट-न्यूट्रॉन प्रदर्शन रिएक्टर के निर्माण में भी भाग लिया है और चीन की समृद्ध यूरेनियम खरीद का 90% तक हिस्सा आपूर्ति करता है। 2025 में इन आपूर्तियों में 40% की वृद्धि हुई।

    2015 से 2025 के बीच चीन का नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन दस गुना बढ़ा और पिछले वर्ष कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 25% तक पहुंच गई। 2030 तक इसे 30% करने का लक्ष्य है। 2025 में चीन ने 162 GWh नई बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता शुरू की—जो वैश्विक कुल का लगभग आधा और अमेरिका के आंकड़े से 3.5 गुना अधिक है।

    सेचिन ने ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता के बीच बढ़ते संबंध तथा परिवहन के तेजी से विद्युतीकरण को भी रेखांकित किया। मई 2026 में सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे के माध्यम से बिजली की बिक्री में साल-दर-साल 60% से अधिक की वृद्धि हुई। सेचिन द्वारा प्रस्तुत आकलन के अनुसार, विद्युतीकरण के कारण मोटर ईंधन की मांग में 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी आई है।

    ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक मार्ग

    सेचिन ने महत्वपूर्ण खनिजों और लॉजिस्टिक्स को ऊर्जा सुरक्षा के तेजी से महत्वपूर्ण घटक बताया। दुनिया की लगभग 90% दुर्लभ पृथ्वी धातु प्रसंस्करण क्षमता चीन में केंद्रित है, जबकि इन धातुओं के वैश्विक भंडार में रूस की हिस्सेदारी 10% है।

    पिछले वर्ष रूस ने चीन को तांबा कंसंट्रेट और तांबे की आपूर्ति दोगुनी कर दी। 2026 के पहले सात महीनों में तांबे के अयस्क और कंसंट्रेट की आपूर्ति भी दोगुनी हुई।

    चीन के रणनीतिक तेल भंडार का वर्तमान अनुमान 1.4 अरब बैरल है। फरवरी से जून 2026 के बीच चीन ने अपने तेल आयात में 5.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कमी की। सेचिन द्वारा उद्धृत अनुमान के अनुसार, इन उपायों के बिना तेल की कीमतें 30 डॉलर प्रति बैरल और अधिक हो सकती थीं।

    हॉर्मुज संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों और वैकल्पिक मार्गों के महत्व को उजागर किया। उत्तरी समुद्री मार्ग (Northern Sea Route) डिलीवरी समय को 1.5–2 गुना कम कर सकता है और लागत में एक-तिहाई तक की कमी ला सकता है। रूस और चीन के बीच विशेष संबंधों के माध्यम से चीन को इस मार्ग तक प्राथमिक पहुंच हासिल करने का अवसर मिलता है।

    रणनीतिक साझेदारी

    रूस-चीन ऊर्जा सहयोग अब तेल, गैस और कोयले से लेकर परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और बिजली ग्रिड, महत्वपूर्ण धातुओं, परिवहन के विद्युतीकरण तथा वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स तक फैला हुआ है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय भुगतान अब लगभग पूरी तरह रूबल और युआनमें किए जाते हैं।

    टैरिफ युद्धों, अमेरिकी डॉलर में अस्थिरता, पश्चिमी देशों में बढ़ते सरकारी कर्ज और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था के कमजोर होने की पृष्ठभूमि में सेचिन ने जोखिम प्रबंधन, विश्वास, परस्पर पूरकता और निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

    “एक तार से धुन नहीं बन सकती; एक पेड़ से जंगल नहीं बन सकता,” सेचिन ने एक चीनी कहावत का उद्धरण देते हुए कहा।

    सेचिन ने जोर दिया कि रूस और चीन के बीच रणनीतिक साझेदारी के आगे विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियां तैयार हो चुकी हैं और दोनों देशों को इन्हें बनाए रखने तथा मजबूत करने की आवश्यकता है।

    “हमें यह दौड़ जीतनी होगी। हमारे लोगों का भविष्य इसके परिणाम पर निर्भर करता है। जैसा कि चीन में कहा जाता है, ‘पूर्वी हवा पश्चिमी हवा पर भारी पड़ती है।’” सेचिन ने कहा।

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    एलेना कुज़नेत्सोवा
    इंटरनेशनल कम्युनिकेशंस ऑफिस

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