जंगल की आग में जल गए करोड़ों जानवर और पशु-पक्षी, प्रकृति को पहुंचा बड़ा नुकसान

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वैज्ञानिकों ने बताया क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा असर:

इंडिया में जहां इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। सर्दी की वजह से ट्रेनों से लेकर हवाई जहाज तक समय पर नहीं चल पा रहे हैं ऐसे में एक दुनिया में ऐसी भी जगह है जहाँ भीषण गर्मी से आग से जले जंगल में 48 करोड़ निर्दोष निरीह जानवर जलकर काल के मुँह में समां गए। यह जगह ऑस्ट्रेलिया का सिडनी इलाका है। जहाँ इन दिनों भारी तबाही मची है।

बता दें कि इस समय ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में आज कल बेहद गर्मी पड़ रही है। इंडिया में जहाँ सर्दी ने सौ साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है तो सिडनी में ऐसे हालात हैं कि 79 वर्षों के बाद यहां का तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा पहुंचा है। वैज्ञानिक इसे क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा असर मान रहे हैं।

न्यू साउथ वेल्स का 30% जंगल खत्म हो गया: ऐसी स्थिति में वहां पर पिछले माह के शुक्रवार के दिन यानि कि 8 नवम्बर 2019 इस देश के तट के पास मौजूद लगभग 1,000 किलोमीटर (621 मील) “आला” अभयारण्य (“कोआला” ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक वृक्षों पर रहने वाला, शाकाहारी प्राणी है। यह ‘फ़ैसकोलार्कटिडाए’ जीव वैज्ञानिक कुल का इकलौता सदस्य है जो अभी तक विलुप्त नहीं हुआ है।) के 2,000 हेक्टेयर जंगल में आग लग गयी। इस बारे में आग से बचाए गए कोआला को पानी पिलाए जाने का विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि एक अनुमान के मुताबिक 8 हजार कोआला के मरने की आशंका है।

ऑस्ट्रेलिया के वेल्स क्षेत्र में सबसे ज्यादा कोआला रहते हैं। इनकी संख्या करीब 28 हजार है। पर्यावरण मंत्री सुसान ली ने कहा, ‘हो सकता है इस क्षेत्र की 30% आबादी खत्म हो गई हो क्योंकि उनका 30% इलाका खत्म हो गया है। जब आग थोड़ी शांत होगी तो ठीक तरह से सर्वे किया जाएगा।’

आग लगने के कारण जहां सैकड़ों पशुओं एवं वन्य प्राणियों के मारे जाने की आशंका है। जंगल में लगी इस आग के धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करते चले जाने से सबसे प्रभावित न्यू साउथ वेल्स में दमकलकर्मियों ने पिछले नवम्बर महीने से सैकड़ों जगह पर आग बुझाने का काम लगातार करती रही फिर भी दो लोगों के अपने घर बचाने के प्रयास में मौत हो गयी है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण ऑस्ट्रेलिया में आग का मौसम लंबा होने के अलावा अधिक जोखिम पूर्ण भी हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि आस्ट्रेलिया में रिकार्ड गर्मी होने के एक साल बाद गर्मी से पहले ही इस आग की गंभीरता को लेकर चिंतित अवश्य थे। वहीं पर ऑस्ट्रेलिया के रिकार्ड में वर्ष 2018 और 2017 क्रमशः तीसरा और चौथा सबसे गर्म सालों में रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक यहां के एक ब्यूरो “स्टेट ऑफ द क्लाइमेट” के वर्ष 2018 की रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां पर जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी पड़ने से ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है और सूखे जैसे अन्य प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता में भी बढ़ोत्तरी हुई है जिसमे सबसे बड़ा योगदान कार्बनडाई आक्साइड CO2 के प्रचुर मात्रा में उत्सर्जन होने से है।

फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग से भारी नुकसान का अंदेशा है। विशेषज्ञों को डर सता रहा है कि करीब 48 करोड़ जानवर इस आग में मर चुके हैं। इनमें करीब एक तिहाई कोआला की प्रजाति पर संकट है। सिडनी यूनिवर्सिटी के वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इन जानवरों में पक्षियों, सरीसृपों की भी बड़ी प्रजाति शामिल हो सकती है।

  • प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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