एक तरफ रोजगार के लिए देश में बेरोजगारों की क्रांति का बिगुल फूंक दिया गया है जिसे 17 सितम्बर को करोङों लोगों ने सोशल मीडिया व अन्य विभिन्न माध्यमों से देखा की देश में अब बेरोजगारी कितनी बड़ी समस्या है। वास्तव में बेरोजगारी एक भयानक अभिशाप है। इसकी पीड़ा वही समझ सकता है, जो इस दौर से गुजरा हो। लखनऊ में एक प्राइवेट कंपनी ने ऑफिस सहायक पद के लिए, 5 वैकेंसी निकली। हजार से भी ज्यादा युवा उमड़ आये। ये तस्वीर बताती है की एक अदद नौकरी का संघर्ष, महाभीषण है। वास्तव में इन युवाओं को आत्मसम्मान के साथ काम चाहिए जिससे वे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। -जीतेन्द्र वर्मा जीतू पटेल







