राहुल कुमार गुप्ता
रात अंधेरा घना छा गया।
ट्विंकल का मन थोड़ा घबरा गया।।
बोली, “पापा, भूत बाबा आया।
साथ में काली छाया लाया!!”
पापा हँसकर पास में आए।
ट्विंकल को गोदी में बिठाए।।
प्यार से बोले, “सुनो बिटिया रानी।
भूत-प्रेत की झूठी है कहानी।।
रात अंधेरी जब होती है।
आँख हमारी धोखा खाती है।।
परदा हिले तो भूत लगे,
परछाहीं से डर जाग उठे!!
अंधेरा तो बस एक चादर है।
जिसमें सोता पूरा जग है।।
जो मन में हम सोचेंगे।
वही चित्र हम देखेंगे।।
अगर सोचोगे डर की बात।
डरावनी लगेगी पूरी रात।।
अगर सोचोगे तुम परियाँ सुंदर।
भाग जाएगा सारा डर!!
सूरज ढलकर विश्राम मनाता।
चाँद-सितारों को जगाता।।
रात न डराती, रात सुलाती।
सपनों की दुनिया में ले जाती।।
दीपक जलाओ, मन को समझाओ।
प्यारी-सी मुस्कान सजाओ।।
डर को कह दो अब दूर भगे।
अब ट्विंकल को न डर लगे!!”







