राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे थे वामन भगवान, तीन पग भूमि मांगकर लिया था तीनों लोकों का माप
डॉ. शैलजा शर्मा
लखनऊ। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। बुधवार, 23 सितंबर 2026 को वामन द्वादशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि के यज्ञ में पहुंचकर उनसे तीन पग भूमि मांगी थी।
वामन अवतार की कथा भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक मानी जाती है। यह कथा विनम्रता, दान, वचन पालन और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है।
क्या है वामन अवतार की कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने अदिति और कश्यप ऋषि के पुत्र के रूप में वामन अवतार लिया। उस समय राजा बलि अपने पराक्रम और सामर्थ्य के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर चुके थे और एक यज्ञ कर रहे थे।
इसी दौरान भगवान विष्णु ब्राह्मण बालक के रूप में वामन बनकर राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे। उन्होंने राजा बलि से केवल तीन पग भूमि मांगी। बलि ने अपने वचन के अनुसार उनकी मांग स्वीकार कर ली।
इसके बाद वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर लिया। धार्मिक कथा के अनुसार, उन्होंने—
- पहले पग में पृथ्वी को नाप लिया।
- दूसरे पग में स्वर्गलोक को अपने चरणों में समेट लिया।
- तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान शेष नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया।
राजा बलि की इस समर्पण भावना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें सुतल लोक प्रदान किया और उनकी रक्षा करने का वर दिया। इस कथा में राजा बलि की दानशीलता, वचनबद्धता और समर्पण को विशेष महत्त्व दिया गया है।
वामन द्वादशी पर कैसे करें पूजा?
वामन द्वादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। घर पर पूजा करते समय श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार विधि अपना सकते हैं।
पूजा के सामान्य चरण –
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु या वामन भगवान की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें।
- दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
- जल, अक्षत, पुष्प और तुलसी-दल अर्पित करें।
- पीले वस्त्र या पीले पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।
- घर की पूजा-पद्धति के अनुसार पंचामृत से अभिषेक करें।
- वामन अवतार की कथा का पाठ या श्रवण करें।
- भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें। “ॐ वामनाय नमः” का जाप भी किया जाता है।
- अंत में आरती कर प्रसाद अर्पित करें।
- वामन अवतार का क्या है संदेश?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वामन अवतार की कथा मनुष्य को विनम्रता, सत्य-वचन, दान और समर्पण का संदेश देती है। राजा बलि की कथा यह भी बताती है कि सामर्थ्य और वैभव के बावजूद वचन का पालन और ईश्वर के प्रति समर्पण महत्वपूर्ण माना गया है।
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विशेषज्ञ की राय
डॉ. शैलजा शर्मा दीक्षित, होम्योपैथिक चिकित्सक, लखनऊ के अनुसार, धार्मिक पर्व और उनसे जुड़ी कथाएं भारतीय परंपरा में केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवन-मूल्यों का संदेश भी देती हैं। वामन अवतार की कथा विशेष रूप से विनम्रता, वचन निभाने, दानशीलता और अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा देती है।







